झालावाड़ में 129 लोगों ने लिया देहदान का संकल्प, देहदानी परिवारों का जिला प्रशासन ने किया सम्मान
झालावाड़ (राजस्थान)। देहदान के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देने वाले देहदानी परिवारों तथा देहदान जागरूकता में उल्लेखनीय योगदान देने वाले समाजसेवियों का बुधवार को जिला कलेक्ट्रेट में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने झालावाड़ मेडिकल कॉलेज की ओर से तैयार प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर देहदानी परिवारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का सम्मान किया।
देहदान करने वाले परिवारों का अभिनंदन
कार्यक्रम संयोजक एवं मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग के वरिष्ठ आचार्य तथा केंद्रीय देहदान समिति के सदस्य डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि स्वर्गीय गिरधरी मोटवानी (भवानीमंडी) के देहदान के लिए उनके परिजन मोहन, हर्ष, निधि एवं रक्षिका मोटवानी, स्वर्गीय राजरानी अदलक्खा (छीपाबड़ौद) के देहदान के लिए उनके पुत्र सुरेश अदलक्खा, डॉ. जे.एल. लोढ़ा (झालावाड़) के देहदान के लिए उनकी पत्नी मालती जैन तथा मानव प्रभु के देहदान के लिए अपना घर, भरतपुर और जय माता कल्याण समिति, खानपुर को अभिनंदन-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
जागरूकता फैलाने वालों को सम्मान
देहदान के प्रति जनजागरूकता फैलाने में उल्लेखनीय योगदान के लिए शाइन इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. कुलवंत गौड़, भवानीमंडी नगर संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल, झालावाड़ के अजय गोयल एवं नितिन कटारिया को भी प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय पोरवाल, एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. गोपाल शर्मा, वरिष्ठ आचार्य डॉ. मनोज कुमार शर्मा तथा प्रोफेसर डॉ. हेमलता शर्मा उपस्थित रहे।
129 लोगों ने किया देहदान का संकल्प
डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग में अब तक 129 लोगों ने देहदान के लिए संकल्प-पत्र भरे हैं, जबकि 81 देह अध्ययन के लिए उपलब्ध हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि सामान्य मृत्यु के बाद प्राप्त मानव शरीर को मेडिकल भाषा में सम्मानपूर्वक 'कैडेवर' कहा जाता है। प्रथम वर्ष एमबीबीएस के विद्यार्थियों को एनाटॉमी विभाग में मानव शरीर की आंतरिक संरचना का व्यावहारिक अध्ययन कराने के लिए इन्हीं कैडेवर का उपयोग किया जाता है।
चिकित्सा शिक्षा में देहदान का महत्व
उन्होंने कहा कि देहदान केवल एक सामाजिक सेवा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के डॉक्टरों को बेहतर प्रशिक्षण देने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे महान कार्य के लिए देहदानी परिवार समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
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