सीईसी विरोध प्रदर्शन मामले में 13 छात्रों को राहत, 5 जमानत बांड और 8 निजी मुचलके पर रिहा
नई दिल्ली: नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने 13 छात्रों की रिहाई का आदेश दिया है। अदालत ने 5 छात्रों को 15,000 रुपये के जमानत बांड पर और 8 छात्रों को निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। इन सभी को सोमवार को अदालत ने जमानत दी थी।
17 छात्र और एक पत्रकार हुए थे गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को सीईसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान कुल 17 छात्रों और एक स्वतंत्र पत्रकार को गिरफ्तार किया था। वहीं, 4 महिला आरोपियों को सोमवार रात ही रिहा करने का आदेश दिया गया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) कौतुक भारद्वाज ने समर्थ सिंथेघ, रुद्र प्रताप सिंह, अनुज भगत, अमन अग्रवाल और गजेंद्र सिंह की ओर से पेश किए गए जमानत बांड स्वीकार करने के बाद उनकी रिहाई का आदेश दिया।
आर्थिक तंगी के चलते 8 आरोपी जमानत राशि नहीं दे सके
अधिवक्ता साइमन फारूक और मोहम्मद आजम खान कुछ छात्रों की ओर से अदालत में पेश हुए। उन्होंने बताया कि शेष 8 आरोपी दिल्ली के बाहर के रहने वाले हैं और आर्थिक तंगी के कारण फिलहाल जमानत राशि जमा करने की स्थिति में नहीं हैं। वकीलों ने दलील दी कि अगर उन्हें निजी मुचलके पर रिहा नहीं किया गया तो जमानत देने का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
8 आरोपियों को निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश
दलीलें सुनने के बाद अदालत ने धर्मेंद्र, रोहित, आदर्श, सनी देओल, ब्रजेश पांडे, शेख यूनुस, अदनान बरमारे और बुद्धशील थावरे को रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने अगली सुनवाई तक उनके निजी मुचलके स्वीकार कर लिए। साथ ही उन्हें तिहाड़ जेल से इस शर्त पर रिहा करने का निर्देश दिया कि वे रिहाई के 15 दिनों के भीतर जमानत बांड प्रस्तुत करेंगे।
जांच अधिकारी की हिरासत बढ़ाने की मांग खारिज
सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत से अदालत में पेश किया गया। जांच अधिकारी ने न्यायिक हिरासत को 13 दिनों के लिए बढ़ाने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने इस आवेदन को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि सभी आरोपियों को पहले ही 5 अक्टूबर को जमानत दी जा चुकी है।
जमानत के साथ रखी गईं कई शर्तें
छात्रों को 15,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानतदार के साथ जमानत दी गई। जमानत की शर्तों में जांच में हस्तक्षेप नहीं करना, अदालत में नियमित रूप से पेश होना और पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ना शामिल है। यह मामला पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने वाले कानून की धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। अदालत के समक्ष पेश किए गए गिरफ्तारी दस्तावेजों में जांच के समर्थन में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के तौर पर सीसीटीवी फुटेज का भी उल्लेख किया गया है।
(एएनआई)
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