रीवा में 2 साल की मासूम की मौत, परिजनों ने इलाज और ऑक्सीजन में लापरवाही के लगाए आरोप
रीवा (मध्य प्रदेश)। रीवा के संजय गांधी अस्पताल और रीवा के निजी अस्पताल में एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां इलाज के अभाव और अस्पताल की कथित लापरवाही के कारण एक 2 वर्षीय मासूम बच्ची ने अपना दम तोड़ दिया। बच्ची की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और उन्होंने रीवा अस्पताल पर कई संगीन आरोप लगाए हैं।
ऑक्सीजन के लिए टालमटोल का आरोप, इलाज के दौरान मासूम की मौत
ऑक्सीजन देने के नाम पर टालमटोल की गई" – रोती हुई नानी की आपबीती बच्चे की नानी ने रोते-बिलखते हुए मीडियाकर्मियों को बताया कि 2 साल की नातिन को निमोनिया, तेज बुखार और लंग्स में इंफेक्शन की शिकायत थी। उसे रीवा अस्प्ताल गंभीर हालत में भर्ती कराया गया था।
ऑक्सीजन नहीं मिलने का आरोप, परिजनों की गोद में मासूम ने तोड़ा दम
परिजन के अनुसार, बच्चे को ऑक्सीजन की सख्त जरूरत थी, लेकिन अस्पताल में लगातार टालमटोल की गई। उनसे कहा गया कि बच्चे को ऑक्सीजन में ले जा रहे हैं, लेकिन सही समय पर सही इलाज और ऑक्सीजन नहीं दी गई। डॉक्टरों ने रेफर करने की बात कही, लेकिन तब तक मासूम ने परिजनों की गोद में ही दम तोड़ दिया।
50,000 खर्च करने के बाद भी नहीं बच सकी जान
मासूम की नानी ने आरोप लगाते हुए कहा: हम रीवा अस्पताल में इलाज के लिए आए थे। हमने दवाइयों और इलाज में करीब 50,000 तक खर्च कर दिए। नातिन को भर्ती कराया गया था, कल शाम तक हम दवाइयां कराते रहे, लेकिन डॉक्टरों ने सही से इलाज नहीं किया। 4-5 बजे के करीब जब हालत बिगड़ी तो संजय गांधी अस्पताल में रेफर करने की बात करने लगे। अंततः हमारे बच्चे की जान चली गई।"
अस्पताल परिसर में मचा हड़कंप, परिजनों का फूटा गुस्सा
मासूम की मौत के बाद संजय गांधी अस्पताल परिसर में परिजनों की चीख-पुकार मच गई। परिजनों का आरोप है कि यदि समय पर सही इलाज और ऑक्सीजन मिल जाती, तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि परिजनों ने रीवा के निजी व सरकारी अस्पताल पर आरोप लगाए हैं।
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