नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आरोपी को 20 साल की कठोर सजा
डूंगरपुर: नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के गंभीर मामले में पोक्सो न्यायालय ने ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। विशेष पोक्सो अदालत ने आरोपित को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपित पर कुल 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
7 दिसंबर 2025 को दर्ज कराई गई थी रिपोर्ट
मामले के अनुसार, 7 दिसंबर 2025 को पीड़िता के पिता ने पुलिस थाना रामसागड़ा में एक लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि उनकी नाबालिग पुत्री 7 नवंबर 2025 को स्कूल से लौटने के बाद दोपहर करीब 3-4 बजे बिना बताए घर से निकल गई थी। परिजनों द्वारा काफी तलाश और पूछताछ करने पर पता चला कि आरोपित राकेश पुत्र कांतिलाल डामोर, निवासी कुवालिया फला डाबरा पाडा, पुलिस थाना अर्थूना जिला बांसवाड़ा, नाबालिग को बहला-फुसलाकर भगा ले गया है। इस शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया।
आरोपी राकेश डामोर गुजरात से गिरफ्तार
अनुसंधान के दौरान पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए नाबालिग पीड़िता को दस्तयाब किया। पीड़िता की मेडिकल जांच और चिकित्सकीय परीक्षण कराने पर उसके गर्भवती होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच की गति बढ़ा दी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डूंगरपुर पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के आदेशानुसार, एक विशेष टीम का गठन किया गया। रामसागड़ा थानाधिकारी कैलाश पंसारिया के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपित राकेश डामोर को राजकोट गुजरात से डिटेन कर गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने पुख्ता सबूत जुटाकर कोर्ट में चालान किया पेश
पुलिस ने आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग कर निष्पक्ष जांच की और आरोपित के खिलाफ मजबूत साक्ष्य जुटाकर न्यायालय में चालान पेश किया। अदालत में सुनवाई के दौरान विशिष्ट लोक अभियोजक (पोक्सो न्यायालय, डूंगरपुर) नरेश कलाल ने प्रभावी पैरवी की, जबकि थानाधिकारी रामसागड़ा ने समय पर गवाहों को अदालत के समक्ष पेश किया।
आरोपी को 20 साल की सुनाई गई सजा
इस मामले में दोनों पक्षों की बहस और साक्ष्यों का अनुशीलन करने के बाद पोक्सो न्यायालय ने आरोपित राकेश डामोर को दोषी माना। अदालत ने उसे पोक्सो एक्ट 2012 की धारा 5(L)/6 के तहत 20 साल के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने और धारा 5(J)(ii)/6 के तहत भी 20 साल के कठोर कारावास व 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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