GSVM मेडिकल कॉलेज कानपुर में ₹25 करोड़ के मिनी स्टेडियम पर विवाद, स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर उठे सवाल
कानपुर (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के करीब 18 जिलों की स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल (GSVM) मेडिकल कॉलेज में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक तरफ अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं के अभाव में मरीजों की सांसें अटक रही हैं, वहीं दूसरी तरफ डॉक्टरों के मनोरंजन और फिटनेस के लिए ₹25 करोड़ की भारी-भरकम लागत से एक आलीशान मिनी स्टेडियम बनाने की मंजूरी दी गई है।
स्टेडियम पर करोड़ों खर्च, मरीजों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव
इस स्टेडियम में फुटबॉल ग्राउंड, बास्केटबॉल कोर्ट, बैडमिंटन कोर्ट और ओपन जिम जैसी लग्जरी सुविधाएं तैयार की जाएंगी। अस्पताल के बजट आवंटन और जमीनी हकीकत की तुलना इस भारी असंतुलन को साफ बयां करती है। एक तरफ जहां महज ₹25 करोड़ में पूरा पैरामेडिकल ब्लॉक और लगभग ₹40 करोड़ की लागत से 7 मंजिला भव्य रिसर्च विंग का निर्माण हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ सिर्फ एक खेल के मैदान के लिए ₹25 करोड़ लुटाए जा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या यह खेल मैदान मरीजों की जान बचाने से ज्यादा जरूरी हो गया है? हकीकत यह है कि दूर-दराज से आने वाले गरीब मरीजों के लिए यहां बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।
तीमारदार खुद उठा रहे मरीजों की जिम्मेदारी
अस्पताल में वार्ड बॉय की इस कदर कमी है कि लाचार तीमारदार खुद अपने मरीजों का स्ट्रेचर और व्हीलचेयर खींचने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी के दिनों में मरीजों के परिजनों के बैठने के लिए उचित मात्रा में शेड या शेल्टर तक नहीं हैं, जिसके कारण लोग पेड़ों की छांव में दिन काटने को मजबूर हैं। एक तरफ स्ट्रेचर खींचने वाले हाथ नहीं हैं और दूसरी तरफ करोड़ों के स्टेडियम में फुटबॉल खेलने की तैयारी है। इस गंभीर बजट असंतुलन पर अस्पताल प्रशासन को जल्द ही जनता और सरकार के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
स्टेडियम में होंगे राज्य स्तरीय टूर्नामेंट
वहीं, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय काला ने बताया कि बिल्डिंग काफी ज्यादा पुरानी हो गई है, जिसके कारण इसका भी जीर्णोद्धार कराया जाएगा और इसके अलावा ₹25 करोड़ की लागत से मिनी स्टेडियम बनाया जाएगा, जहां पर राज्य स्तर के अगर टूर्नामेंट भी होने होंगे तो हो सकते हैं।
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