बैतूल के बागवानी गांव में प्राथमिक स्कूल के 34 बच्

बैतूल के आदिवासी गांव में स्कूल भवन नहीं, टीन शेड के नीचे पढ़ने को मजबूर 34 बच्चे

34 Students in Betul Tribal Village Forced to Study Under Tin Shed

बैतूल (मध्य प्रदेश)। जिले के आठनेर विकासखंड के आदिवासी बाहुल्य बागवानी गांव में शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है। यहां कक्षा 1 से 5 तक संचालित प्राथमिक शाला के बच्चों के पास पढ़ाई के लिए स्कूल भवन तक उपलब्ध नहीं है। स्कूल के पास जुगाड़ से तैयार किए गए टीन शेड में बच्चों की कक्षाएं संचालित हो रही हैं। छात्र जमीन पर फट्टे बिछाकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। यह स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े कर रही है।

शिक्षा संजीवनी अभियान के बावजूद नहीं सुधरे हालात

बैतूल जिले में चलाए जा रहे शिक्षा संजीवनी अभियान के बावजूद बागवानी गांव के बच्चों को स्कूल भवन और बैठने के लिए डेस्क जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। अभियान चलने के बाद भी स्कूल की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। बच्चों को आज भी वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे पढ़ाई करनी पड़ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि शिक्षा विभाग इस समस्या पर ध्यान क्यों नहीं दे रहा है।

जिला पंचायत सदस्य रामचरण इरपाचे ने किया स्कूल का निरीक्षण

जिला पंचायत सदस्य रामचरण इरपाचे ने ग्राम बागवानी पहुंचकर प्राथमिक स्कूल का निरीक्षण किया। स्कूल की स्थिति देखकर उन्होंने शिक्षा संजीवनी अभियान, शिक्षा विभाग और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश को आजाद हुए 80 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद आदिवासी अंचलों में शिक्षा व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। उन्होंने स्कूल की जमीनी स्थिति पर दुख जताया।

34 छात्र-छात्राएं मूलभूत सुविधाओं से वंचित

रामचरण इरपाचे के मुताबिक, वन ग्राम बागवानी में कक्षा 1 से 5 तक के 34 छात्र-छात्राएं मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई कर रहे हैं। गांव में न तो स्कूल भवन है और न ही अतिरिक्त कक्ष की व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग पिछले 5 से 7 वर्षों से स्कूल भवन की स्वीकृति की बात कर रहा है, लेकिन आज तक बच्चों के बैठने तक की उचित व्यवस्था नहीं हो सकी है।

ग्रामीणों ने खुद तैयार किया टीन शेड, जमीन पर बैठकर पढ़ रहे बच्चे

जिला पंचायत सदस्य ने बताया कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए ग्रामीणों ने खुद वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की है। पुराने खंडहर भवन के सामने बल्लियां खड़ी कर टीन शेड बनाया गया है। इसी टीन शेड के नीचे बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही डिजिटल इंडिया है? उन्होंने सरकार और शिक्षा विभाग से इस समस्या पर ध्यान देने की मांग की।

शिक्षा व्यवस्था और सरकारी दावों पर उठे सवाल

रामचरण इरपाचे ने कहा कि प्रदेश सरकार के मुखिया बैतूल से केवल हवाई बातें करके चले गए, जबकि जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बागवानी गांव के स्कूल की स्थिति को शिक्षा विभाग और सरकार के दावों के विपरीत बताया। साथ ही सरकार और शिक्षा विभाग से बच्चों को स्कूल भवन सहित जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की ओर ध्यान देने की मांग की।

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