यूपी के इटावा में ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के नाम पर 500 से ज्यादा लोगों से ठगी, 4 आरोपी गिरफ्तार
इटावा (उत्तर प्रदेश)। इटावा पुलिस ने गुरुवार को ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के जरिए 500 से ज्यादा लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने के आरोप में चार सदस्यों वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह पिछले 8 से 10 महीनों से सक्रिय था और अब तक मिले दस्तावेजों के आधार पर 500 से अधिक लोगों को निशाना बना चुका है। अधिकारियों का कहना है कि पीड़ितों की संख्या आगे और बढ़ सकती है।
चार आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अंशुल उर्फ हंसू तिवारी, राखी राणावत, अंकित मिश्रा और मोहित के रूप में हुई है। इनमें से दो आरोपी इटावा जिले के रहने वाले हैं, जबकि एक मैनपुरी और चौथा औरैया का निवासी है। पुलिस ने यह कार्रवाई सिविल लाइंस थाना पुलिस ने स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) और सर्विलांस टीमों के साथ मिलकर की।
मोबाइल फोन, बैंक कार्ड और दो गाड़ियां जब्त
पुलिस ने आरोपियों के पास से 16 मोबाइल फोन, 42 एटीएम और डेबिट कार्ड तथा छह फर्जी सिम कार्ड बरामद किए हैं। इसके अलावा एक लैपटॉप, बैंक पासबुक, चेक बुक और पहचान से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। पुलिस ने गिरोह के लेन-देन का विवरण रखने वाला एक रजिस्टर भी कब्जे में लिया है। एसएसपी ने बताया कि ठगी की रकम से खरीदी गई दो गाड़ियों को भी जब्त किया गया है।
कमीशन का लालच देकर लेते थे पहचान दस्तावेज
एसएसपी के अनुसार, गिरोह के सदस्य ग्रामीणों को कमीशन देने का लालच देकर उनके पहचान दस्तावेज हासिल करते थे। इसके बाद इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सिम कार्ड लिए जाते थे और संबंधित लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। पुलिस का आरोप है कि गिरोह इन सिम कार्डों और बैंक खातों के जरिए ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी का काम संचालित करता था। इस प्रक्रिया में दूसरे लोगों की पहचान और बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था।
बैंक खातों के जरिए रकम का लेन-देन
पुलिस के मुताबिक, ठगी से हासिल की गई रकम को अलग-अलग बैंक खातों में घुमाया जाता था। इसके बाद एटीएम कार्ड के जरिए नकदी निकाली जाती थी। गिरोह के सदस्य आपस में रकम बांट लेते थे या कुछ पैसे दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते थे। जांच के दौरान पुलिस ने इस लेन-देन से संबंधित दस्तावेज और रजिस्टर भी बरामद किए हैं।
8 से 10 महीने से सक्रिय था गिरोह
एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया, “अब तक मिले दस्तावेजों के आधार पर, इन्होंने 500 से ज्यादा लोगों को ठगा है। हालांकि, यह संख्या और बढ़ सकती है। ये लोग पिछले 8 से 10 महीनों से सक्रिय थे।” उन्होंने बताया कि गिरोह के सदस्य पुलिस का दबाव बढ़ने, गिरफ्तारी का डर होने या किसी शिकायत की जानकारी मिलने पर कुछ समय के लिए अपनी गतिविधियां रोक देते थे। इसके बाद वे फिर से ठगी का काम शुरू कर देते थे।
कई गेमिंग एप्लिकेशन के जरिए चल रहा था नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, गिरोह बड़े नेटवर्क के तहत कई अलग-अलग गेमिंग एप्लिकेशन के माध्यम से काम करता था। जांचकर्ताओं को आशंका है कि इस नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। एसएसपी ने कहा कि जांच आगे बढ़ने के साथ अन्य संदिग्धों की पहचान की जाएगी। पुलिस गिरोह के पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े लेन-देन की जांच कर रही है।
आरोपियों पर लगेगा गैंगस्टर एक्ट
एसएसपी ने बताया कि पुलिस आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करेगी। इसके साथ ही आपराधिक गतिविधियों के जरिए जुटाई गई संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। पुलिस मामले की जांच के दौरान गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और संभावित संपत्तियों की जानकारी जुटाएगी।
पुलिस टीम को 20 हजार रुपये का इनाम
इस कार्रवाई में शामिल पुलिसकर्मियों को उनके काम के लिए 20,000 रुपये का इनाम देने की घोषणा की गई है। एसएसपी ने गिरोह के बारे में अहम जानकारी जुटाने का श्रेय एसओजी और सर्विलांस टीमों को दिया। उन्होंने बताया कि कार्रवाई में सिविल लाइंस थाना पुलिस की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। (Source: ANI)
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