जानें आर्टिकल 370 हटने के 7 साल बाद जम्मू-कश्मीर औ

अनुच्छेद 370 हटने के 7 साल बाद: जम्मू-कश्मीर में शांति और विकास, PoJK में अशांति और दमन की हकीकत

7 Years After Article 370: J&K Sees Stability, PoJK Faces Unrest Claims

श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर)। आर्टिकल 370 हटाए जाने के सात साल बाद, जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) की हकीकत बिल्कुल अलग-अलग है। केंद्र शासित प्रदेश में अधिक स्थिरता और विकास देखा जा रहा है, जबकि PoJK में अशांति, पाबंदियों और लोगों के विरोध-प्रदर्शन की खबरें आती रहती हैं। जम्मू-कश्मीर की मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा अख्तर ने कहा कि अगस्त 2019 में हुए संवैधानिक बदलावों के बाद केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा हालात में काफी सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, "अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में शांति का माहौल है और हम इस शांति को बनाए रखना चाहते हैं।"

उग्रवाद और पत्थरबाजी थमने से सुरक्षित माहौल में जी रहे हैं लोग

अख्तर ने कहा कि भारत सरकार के फैसले से स्थानीय उग्रवाद, अलगाववादी गतिविधियों और पत्थरबाजी की घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिली है। इससे लोग उस डर के बिना सामान्य जिंदगी जी पा रहे हैं जिसने कभी उनकी रोजमर्रा की जिदगी को प्रभावित किया था। उन्होंने कहा, "भारत सरकार का सबसे बड़ा फैसला जम्मू-कश्मीर के युवाओं की जान बचाना था। पत्थरबाजी और स्थानीय उग्रवाद के कट्टरपंथी सिस्टम को खत्म कर दिया गया है। आज, माता-पिता को अपने बच्चों के स्कूल जाने पर उनकी सुरक्षा को लेकर लगातार डर नहीं सताता। लोग शांति से रह रहे हैं और बिना किसी डर के सो पा रहे हैं।"

PoJK में नागरिकों पर हो रहे अत्याचार पर मानवाधिकार कार्यकर्ता की चिंता

लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के उस पार के हालात से तुलना करते हुए, अख्तर ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आम नागरिकों के खिलाफ हिंसा की खबरों पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा, "जब मैं PoJK में हो रही घटनाओं को देखती हूं, तो पता चलता है कि वहां आम लोगों को अपने हक की मांग करने और शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करने पर गोली मारी जा रही है। हम खुशकिस्मत हैं कि यहां हमारी जिंदगी सुरक्षित है और हम शांतिपूर्ण माहौल में रह रहे हैं। हम चाहते हैं कि PoJK के लोगों की बात सुनी जाए और उन्हें उनके हक मिलें। हमें उम्मीद है कि वे भी शांति और सम्मान के साथ जी पाएंगे।"

UKPNP का दावा- घेराबंदी, ब्लैकआउट और जरूरी सेवाओं का संकट

इस बीच, यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) के प्रवक्ता सरदार नासिर अजीज खान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में शासन और आर्थिक हालात को लेकर लोगों में बढ़ते गुस्से के बावजूद वहां सख्त पाबंदियां लागू हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कई पोस्ट में, खान ने आरोप लगाया कि PoJK में 5 जून से घेराबंदी, नाकेबंदी और कम्युनिकेशन ब्लैकआउट की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि वहां के लोगों को खाने-पीने की चीजों, दवाओं और हेल्थकेयर जैसी जरूरी चीजों की कमी का सामना करना पड़ा है। यह भी आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों ने अस्पतालों पर कब्जा कर लिया है।

पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जनता का फूटा गुस्सा

खान ने आगे आरोप लगाया कि मुजफ्फरबाद में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जहां हजारों लोगों ने पाकिस्तान सरकार के दमन, बल के अत्यधिक प्रयोग और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि सुरक्षा कर्मियों ने 31 जुलाई और 1 अगस्त को प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिससे कई लोग हताहत हुए और जनता का गुस्सा और बढ़ गया।

दोनों क्षेत्रों के हालात में जमीन-आसमान का फर्क

एक ओर जहां अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, बेहतर सार्वजनिक सेवाएं और अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण माहौल देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में निवासी और राजनीतिक आवाजें शासन, विकास, आर्थिक तंगी और नागरिक आजादी पर लगी पाबंदियों को लेकर चिंताएं जाहिर कर रही हैं। इससे पिछले सात वर्षों में दोनों क्षेत्रों के हालात में आए अंतर का पता चलता है। ​(भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)

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