मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी 71 वर्षीय लक्ष्मण 7 जु

शहीदों और मृतकों की आत्मशांति के लिए 16 हजार किमी की पदयात्रा पर निकले 71 साल के लक्ष्मण

16 हजार किमी की पदयात्रा पर निकले 71 साल के लक्ष्मण

औरंगाबाद: कोरोना महामारी, सड़क हादसों, प्राकृतिक आपदाओं और देश की रक्षा में शहीद हुए वीर जवानों की आत्मा की शांति और विश्व शांति के संदेश को लेकर 16 हजार किलोमीटर की विश्व राष्ट्रीय एकता कांवड़ यात्रा पर निकले मध्यप्रदेश के इंदौर निवासी 71 वर्षीय वृद्ध लक्ष्मण इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। उम्र के इस पड़ाव में भी उनके चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि देशभक्ति और मानव सेवा का जज्बा साफ दिखाई देता है। वृद्ध ने बताया कि उन्होंने यह कठिन यात्रा 7 जुलाई 2024 को इंदौर से शुरू की थी और पैदल चलते हुए अब तक करीब 16 हजार किमी की दूरी तय कर चुके हैं।

मृतकों की आत्मशांति के लिए गया में पिंडदान

वृद्ध लक्ष्मण ने बताया कि यह यात्रा किसी निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि पुलवामा, कारगिल में शहीद हुए देश के वीर जवानों, कोरोना काल में जान गंवाने वालों, अहमदाबाद विमान हादसा, इंदौर में जहरीला पानी पीने से हुई मौतों सहित देश-दुनिया में असमय जान गंवाने वाले लोगों की आत्मा की शांति के लिए है। इसी क्रम में वे बिहार के गया जी पहुंचे और वहां फल्गु नदी के तट पर विधि-विधान से सभी मृतकों का पिंडदान किया। इसके बाद वे उत्तर प्रदेश के बनारस स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर गए और वहां भगवान भोलेनाथ के दरबार में विश्व शांति एवं मृतकों की आत्मा की तृप्ति के लिए विशेष प्रार्थना की। रविवार को वापसी के दौरान जब वे औरंगाबाद पहुंचे तो स्थानीय लोगों ने फूल-मालाओं के साथ उनका स्वागत किया। 

उम्र को मात देकर सेवा में जुटे लक्ष्मण

लोगों ने उनके पैरों में बंधे घुंघरुओं और हाथ में तिरंगे के साथ इस उम्र में भी लगातार चलते रहने के हौसले को देखकर दंग रह गए। वृद्ध ने कहा कि अपने लिए जिया तो क्या जिया, दूसरों के लिए जीना ही सच्चा जीवन है। इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है। उन्होंने बताया कि वे पिछले कई वर्षों से मूक-बधिर, नेत्रहीन, दिव्यांग और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों की सेवा के लिए लोगों से सहयोग राशि एकत्रित करते हैं और बाढ़, भूकंप जैसी आपदाओं के समय जिला प्रशासन को चंदा सौंप कर मदद करते हैं। उनका कहना है कि जब तक शरीर में जान है, तब तक यह यात्रा और सेवा का कार्य चलता रहेगा। लोगों ने उनके इस जज्बे को सलाम किया और इस पुनीत कार्य की जमकर सराहना की। 

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