स्टाइपेंड और एरियर की मांग पर हड़ताल की तैयारी में MP के 8,000 जूनियर डॉक्टर
भोपाल। मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्टाइपेंड (Stipend) संशोधन और लंबित एरियर की मांग को लेकर प्रदेश के करीब 8,000 जूनियर डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैं। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं। जूनियर डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ओपीडी (OPD) और सामान्य ऑपरेशनों का पूरी तरह बहिष्कार करेंगे। मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए कैजुअल्टी और इमरजेंसी सेवाएं फिलहाल चालू रखी जाएंगी।
तीन महीने से चल रहा आंदोलन
डॉक्टर लंबे समय से अटके हुए स्टाइपेंड में बढ़ोतरी और पिछले एरियर के भुगतान की मांग कर रहे हैं। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JUDA) के नेतृत्व में यह आंदोलन पिछले तीन दिनों से चल रहा है। पिछले तीन दिनों से डॉक्टर काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज करा रहे थे। भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) सहित प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों ने 8 मार्च रविवार को 'जस्टिस मार्च' निकाला और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। डॉक्टरों का कहना है कि सरकार ने केवल आश्वासन दिए हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस आदेश जारी नहीं किया है। यदि मांगें तुरंत नहीं मानी गईं, तो वे इलेक्टिव सेवाओं (सामान्य सर्जरी आदि) का बहिष्कार जारी रखेंगे।
क्या होगा मरीजों पर असर
इस हड़ताल के कारण सरकारी अस्पतालों में आने वाले हजारों मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हर्निया, ऑर्थोपेडिक और अन्य नियोजित सर्जरी (Planned Surgeries) टाली जा सकती हैं। हालांकि, वरिष्ठ डॉक्टरों (Senior Doctors) और कंसल्टेंट्स को व्यवस्था संभालने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जूनियर डॉक्टरों की अनुपस्थिति से काम का बोझ काफी बढ़ जाएगा। डॉक्टरों की अपील है कि सरकार जल्द से जल्द लिखित आदेश जारी करे ताकि वे वापस काम पर लौट सकें।
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