शिवसेना (UBT) विधायक आदित्य ठाकरे ने मंगलवार को आर

आदित्य ठाकरे का ऐलान, छात्र प्रदर्शनकारियों के केस मुफ्त में लड़ेगी शिवसेना (UBT)

Aaditya Thackeray Announces Free Legal Aid for Protesters

मुंबई (महाराष्ट्र) [भारत]: शिवसेना (UBT) विधायक आदित्य ठाकरे ने मंगलवार को आरोप लगाया कि केंद्र और राज्यों में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारें परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों को निशाना बना रही हैं। उन्होंने पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहे छात्रों को मुफ्त कानूनी सहायता देने का आश्वासन दिया। पत्रकारों से बातचीत में ठाकरे ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले वापस लेने के आश्वासन के बावजूद कई राज्यों में छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है।

'नोटिस मिले तो हमें भेजें'

ठाकरे ने कहा, “पिछले दस दिनों से कई शहरों में आंदोलन चल रहा है और युवा छात्र सड़कों पर उतर रहे हैं। यह गुस्सा सरकार के खिलाफ था। हमें बताया गया था कि FIR वापस ले ली जाएंगी। हमने कई जगहों पर छात्रों को बचाया और शिवसेना (UBT) ने फैसला किया है कि हम उनके मामले मुफ्त में लड़ेंगे। मुख्यमंत्री को FIR वापस लेनी चाहिए। अगर किसी को नोटिस मिलता है, तो हमें भेजें। कई वकील ये मामले मुफ्त में लड़ेंगे।”

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया और इसकी जवाबदेही तय किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा, “छात्रों पर AK-47 और कई अन्य हथियार बरसाए गए। अत्यधिक लाठीचार्ज करने वालों के खिलाफ हम कार्रवाई करेंगे। भाजपा का शासन युवा-विरोधी है।”

MH-CET परीक्षा पर भी उठाए सवाल

प्रवेश परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं पर चिंता जताते हुए ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार से MH-CET परीक्षा प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “क्या MH-CET घोटाला है या नहीं? मुख्यमंत्री को इस पर स्पष्ट टिप्पणी करनी चाहिए। कई छात्रों को नुकसान हो रहा है। प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने पर क्या होगा?”

सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का भी लगाया आरोप

ठाकरे ने सरकार पर ऑनलाइन असहमति को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारी छात्र विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी सोशल मीडिया सामग्री को हटाने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी यह टिप्पणी शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत द्वारा छात्र विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीके को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना किए जाने के बाद आई है। राउत ने आरोप लगाया था कि जहां अपराधियों का भाजपा में स्वागत किया जा रहा है, वहीं परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर आपराधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने भी दिए अहम निर्देश

इस बीच, मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए 18 वर्ष से कम आयु के छात्रों को रिहा किया जाए, बशर्ते उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो। सर्वोच्च न्यायालय ने फिलहाल छात्रों के खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने, विरोध प्रदर्शनों से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एफआईआर की जांच कानून के अनुसार जारी रहेगी, लेकिन अगले आदेश तक छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

(एएनआई)

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