CJP कार्यकर्ताओं की हिरासत पर अभिजीत दीपके का आरोप, बोले- वकीलों को थाने में नहीं जाने दिया
नई दिल्ली: महाराष्ट्र के हिंगोली में तिलचट्टा जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने मंगलवार को आरोप लगाया कि दिल्ली में हिरासत में लिए गए पार्टी सदस्यों को अलग-अलग स्थानों पर रखा गया है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने पार्टी के वकीलों को थाने में प्रवेश करने से भी रोक दिया।
तीन कार्यकर्ताओं को अलग-अलग रखने का आरोप
पार्टी सदस्यों की हिरासत के बारे में बात करते हुए दीपके ने कहा कि उन्होंने CJP की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह से बात की थी। उनके मुताबिक, रत्ना सिंह ने बताया कि आशुतोष, अजिंक्य और सौरभ को अलग-अलग रखा गया है, जबकि उनके साथ आए 11 स्वयंसेवकों को किसी अन्य स्थान पर ले जाया गया है। दीपके ने कहा, “मैंने अभी रत्ना (CJP की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह) से बात की। उन्होंने मुझे बताया कि आशुतोष, अजिंक्य और सौरभ को दिल्ली में हिरासत के बाद अलग-अलग रखा गया है। उनके साथ आए 11 स्वयंसेवकों को कहीं और ले जाया गया है।”
जंतर-मंतर में प्रवेश की कोशिश के बाद हिरासत
यह बयान उस समय आया, जब दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को CJP कार्यकर्ताओं आशुतोष रांका, सौरभ दास और अजिंक्य शिंदे को जंतर-मंतर में प्रवेश करने की कोशिश के दौरान हिरासत में ले लिया। बताया गया कि उस समय जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में निरस्त कर दिया गया था। दीपके ने आरोप लगाया कि जब पार्टी के वकील थाने पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी के अन्य सदस्यों को हिरासत में लेने की धमकी दी गई। उन्होंने कहा, “जब हमारे वकील थाने पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया। हमारी पार्टी के अन्य सदस्यों को वहां हिरासत में लेने की धमकी दी गई।”
केंद्र सरकार पर उठाए सवाल
दीपके ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, “देश में तानाशाही चल रही है। नियमों की अनदेखी की जा रही है। आप किस बात से डर रहे हैं? मुझे समझ नहीं आता कि नरेंद्र मोदी के लिए ज्ञानेश कुमार इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं।” इससे पहले, गिरफ्तारियों की निंदा करते हुए दीपके ने पुलिस कार्रवाई की वैधता और नैतिकता पर भी सवाल उठाए थे।
तिरंगा फहराने को लेकर पुलिस कार्रवाई पर सवाल
दीपके ने दावा किया कि उनकी टीम ने मंगलवार सुबह जंतर-मंतर जाकर तिरंगा फहराया था। उन्होंने सवाल उठाया कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना अपराध कैसे हो सकता है। उन्होंने कहा, “हमारी टीम आज सुबह जंतर-मंतर गई और तिरंगा फहराया। तिरंगा फहराना कब से गुनाह हो गया? जो भी जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने को गुनाह समझता है, वह गद्दार है।” उन्होंने आगे कहा कि यदि सौरभ दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे और तिरंगा फहराने के आरोप में गिरफ्तार किए गए अन्य लोगों के खिलाफ आरोप लगाए जाते हैं, तो उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
हिरासत में लिए गए लोगों को कानूनी सहायता देने की मांग
दीपके ने हिरासत में लिए गए लोगों के कानूनी अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उन्हें अपने वकीलों से बात करने की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा। जंतर-मंतर सिर्फ एक जगह नहीं है; यह प्रतिरोध की भावना है।” उन्होंने आगे कहा, “हमें उम्मीद है कि दिल्ली पुलिस उन्हें उनके वकीलों से बात करने देगी। ऐसा नहीं होना चाहिए कि जैसा मेरे साथ हुआ, उन्हें 24 घंटे तक बिना वकील से बात किए हिरासत में रखा जाए। कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें वकील से बात करने की अनुमति दी जानी चाहिए, क्योंकि आप किसी को इस तरह यूं ही नहीं उठा सकते।”
सार्वजनिक स्थलों को लेकर सरकार पर लगाया आरोप
दीपके ने पुलिस की कार्रवाई को कथित तौर पर “तानाशाही मानसिकता का सबसे बड़ा उदाहरण” बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार सार्वजनिक स्थलों का इस्तेमाल अपनी निजी संपत्ति की तरह करना चाहती है। उन्होंने कहा, “तानाशाही नहीं चाहती कि कोई जंतर-मंतर पर जाकर तिरंगा फहराए। वे सोचते हैं कि पूरा देश उनकी निजी संपत्ति है। ऐसा नहीं है; जंतर-मंतर इस देश की जनता का है, 14 करोड़ भारतीयों का है।”
(एएनआई)
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