सुमित रॉय की गिरफ्तारी पर अभिषेक बनर्जी ने पुलिस प

सुमित रॉय की गिरफ्तारी पर भड़के अभिषेक बनर्जी, बोले- राज्य के गृह मंत्री को अक्षमता के लिए हटाया जाए

Abhishek Banerjee Slams Sumit Roy' Arrest, Demands Home Minister Removal

कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने गुरुवार को अपने निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय की गिरफ्तारी के बाद पश्चिम बंगाल सरकार, पुलिस अधिकारियों और न्यायपालिका की कड़ी आलोचना की। कोलकाता में मीडिया से बातचीत के दौरान बनर्जी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके सहायक को फंसाने के लिए झूठे सबूत गढ़े हैं। उन्होंने राज्य के गृह मंत्री को तत्काल पद से हटाने की मांग की और हालिया चुनावी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया।

पुलिस पर पैसे रखकर फंसाने का आरोप

अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि सुमित रॉय की गिरफ्तारी से कुछ घंटे पहले पुलिस अधिकारियों ने रात के समय मौके पर पैसे रखे थे। उन्होंने दावा किया कि रात 1 बजे से 3 बजे के बीच एक एक्सयूवी 300 वाहन वहां पहुंचा और पैसे रखे गए। यह घटना उनके सहायक को हिरासत में लेने से करीब तीन से चार घंटे पहले हुई थी। बनर्जी ने कहा कि उनके पास इस घटना को साबित करने के लिए सबूत हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर वे हाईकोर्ट का रुख कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे। उन्होंने अपने सहायक की गिरफ्तारी को मनगढ़ंत मामले का हिस्सा बताया।

गृह मंत्री और पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

डायमंड हार्बर निर्वाचन क्षेत्र में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए बनर्जी ने वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य के गृह मंत्री को सरासर अक्षमता के लिए तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया जाना चाहिए। उन्होंने डायमंड हार्बर पुलिस जिले के पुलिस अधीक्षक पर भी झूठे सबूत गढ़ने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही की मांग की। बनर्जी ने कहा कि डायमंड हार्बर, उस्थी और मोगराहाट समेत विभिन्न क्षेत्रों के पुलिस अधिकारियों को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि संबंधित पुलिस अधिकारी पिछले कुछ महीनों से ही वहां तैनात हैं, जबकि उनका खुद का क्षेत्र से 12 साल पुराना जुड़ाव है और वहां उनके पारिवारिक संबंध भी हैं।

सुमित रॉय को फर्जी मुठभेड़ में मारने की धमकी का दावा

अपने निजी सहायक की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए बनर्जी ने सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि 27 मई को उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले एक व्यक्ति ने फेसबुक पर सुमित रॉय की तस्वीर पोस्ट की थी। बनर्जी के मुताबिक, इस पोस्ट में सुमित रॉय को फर्जी मुठभेड़ में मारने की मांग की गई थी। उन्होंने कहा कि जिस मामले में उनके सहायक को गिरफ्तार किया गया है, उसी से जुड़े संदर्भ में उन्हें मुठभेड़ की धमकी दी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में न्यायपालिका और संविधान कहां हैं। बनर्जी ने पश्चिम बंगाल को पुलिस राज्य में तब्दील किए जाने का भी आरोप लगाया।

सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग पर भी उठाए सवाल

अभिषेक बनर्जी ने 2026 के पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान चुनावी प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी नेताओं की ओर से उठाए गए मुद्दों और अदालत के निर्देशों के बावजूद चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई।उन्होंने कहा कि वे भाजपा से नहीं, बल्कि भारत के सुप्रीम कोर्ट से बंगाल हारे हैं। बनर्जी ने मांग की कि सरकार या चुनाव आयोग इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि वे खुद सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे और मामले की सुनवाई का लाइव प्रसारण भी होना चाहिए।

SIR और मतगणना प्रक्रिया पर लगाए आरोप

यह विवाद मुख्य रूप से मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतगणना प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है। बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के अधिकारियों ने औपचारिक संचार माध्यमों को दरकिनार कर सुप्रीम कोर्ट के पारदर्शिता संबंधी निर्देशों का पालन नहीं किया। टीएमसी का तर्क था कि अदालत ने औपचारिक और रिकॉर्ड में दर्ज किए जा सकने वाले सर्कुलर जारी करने की बात कही थी, न कि एन्क्रिप्टेड चैट के जरिए निर्देश देने की। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि ऐसे अनौपचारिक निर्देशों के जरिए मतदाता सूची से हटाए गए नामों की संख्या को कृत्रिम रूप से बढ़ाया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की चुनौती खारिज करते हुए चुनाव आयोग के सर्कुलर को बरकरार रखा। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि बैंकिंग और आयकर विभाग जैसे केंद्रीय संस्थानों के कर्मचारियों की चुनावी प्रक्रिया में तैनाती चुनाव कानूनों का उल्लंघन नहीं है।

ईवीएम जलाने और रैंडमाइजेशन में गड़बड़ी का आरोप

बनर्जी ने मतगणना प्रक्रिया में भी कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि मतगणना 4 तारीख को निर्धारित थी और 2 तारीख को सुप्रीम कोर्ट ने रैंडमाइजेशन प्रोटोकॉल का पालन करने का निर्देश दिया था। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया में राज्य और केंद्र दोनों के अधिकारियों की भागीदारी जरूरी थी, लेकिन मतगणना के दौरान एक भी राज्य अधिकारी शामिल नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में धांधली हुई और चुनाव के एक महीने के भीतर ईवीएम जला दी गईं। बनर्जी ने अदालत पर भी इस मामले का संज्ञान नहीं लेने का आरोप लगाया।

ANI

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