झाबुआ में 12 साल के संघर्ष के बाद माही डैम विस्थापित परिवारों को ‘प्रतीकात्मक’ राहत
MP News : झाबुआ। 12 वर्षों के आंदोलन के बाद 3 जनवरी को माही डैम से विस्थापित कुछ परिवारों को सीमित राहत मिली। 61 हितग्राहियों को 18,700 से 20,000 रुपये तक की राशि दी गई। ‘माही डूब संघर्ष समिति’ ने इसे अपर्याप्त बताते हुए कहा कि भूमि मुआवजे में असमानता का मुद्दा अभी भी बना हुआ है, जिससे हजारों विस्थापित आदिवासी परिवार प्रभावित हैं और वे अब भी न्यायसंगत पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।
सीमित राहत
पेटलावद में करीब 12 वर्षों के सतत आंदोलन और कानूनी लड़ाई के बाद माही डैम से विस्थापित परिवारों को 3 जनवरी 2026 को सीमित राहत प्राप्त हुई।पेटलावद क्षेत्र के 12 प्रभावित गांवों का प्रतिनिधित्व करने वाली माही डूब संघर्ष समिति वर्ष 2005 से उचित भूमि मुआवजा और पुनर्वास सहायता की मांग कर रही है। समितॆ ने इससे पहले राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग का दरवाजा खटखटाया था और हजारों आदिवासी परिवारों को न्याय दिलाने के लिए हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की थी।
भुगतान अपर्याप्त
3 जनवरी को लंबे समय से वंचित 61 हितग्राहियों के बैंक खातों में 18,700 से 20,000 रुपये की राशि सीधे जमा की गई। यह राशि पुनर्वास प्लॉट और अन्य लंबित लाभों के लिए सहायता के रूप में दी गई। हालांकि भुगतान का स्वागत किया गया, लेकिन समिति ने इसे “अपर्याप्त और असमान” बताते हुए कहा कि मूल समस्या—सिंचित बनाम असिंचित भूमि के लिए भेदभावपूर्ण मुआवजा दरें—अब भी हल नहीं हुई हैं।
बना हुआ है आर्थिक संकट
यह असमानता अनुमानित रूप से 10,000–12,000 विस्थापित आदिवासी परिवारों को प्रभावित करती है और गांवों में कुल मिलाकर 1 से 1.2 लाख प्रभावित हितग्राहियों से जुड़ी है। समिति का दावा है कि खेती करने वालों के नुकसान का आकलन समान रूप से कभी नहीं किया गया, जिससे विस्थापित होने के वर्षों बाद भी परिवार आर्थिक संकट में बने हुए हैं।
यह भी पढ़ें : https://www.primenewsnetwork.in/state/electric-vehicle-plant-inaugurated-in-lucknow-cm-yogi-said/104218