एम्स भोपाल के वैज्ञानिकों ने कैंसर के इलाज के लिए

कैंसर के खिलाफ एम्स भोपाल का 'ब्रह्मास्त्र', रोशनी पड़ते ही ट्यूमर हो जाएगा नष्ट

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भोपाल। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एम्स भोपाल के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कैंसर जैसी घातक बीमारी के इलाज के लिए एक ऐसी नैनो-तकनीक (Nanotechnology) विकसित की गई है, जो शरीर के स्वस्थ हिस्सों को नुकसान पहुँचाए बिना सीधे कैंसर कोशिकाओं (Cancer Cells) को टारगेट करती है।

विशेष लाल रोशनी पड़ते ही सक्रिय होगा

​प्रकाश से सक्रिय (Light-Activated): इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह दवा शरीर के अंदर तब तक निष्क्रिय या "शांत" रहती है, जब तक उस पर विशेष लाल रोशनी (Red Light) न डाली जाए। रोशनी पड़ते ही यह सक्रिय होकर ट्यूमर को नष्ट करना शुरू कर देती है।

​तकनीक सिर्फ कैंसर सेल्स को ही निशाना बनाती है

यह तकनीक केवल कैंसर सेल्स को ही निशाना बनाती है। इससे कीमोथेरेपी जैसे पारंपरिक इलाजों के मुकाबले शरीर पर कोई बुरा साइड इफेक्ट नहीं होता। ये नैनोकण इंसानी बाल से भी हजारों गुना छोटे होते हैं। इन्हें इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये शरीर के अंदर खुद ट्यूमर तक पहुँच जाते हैं।

इस तरह काम करती है यह तकनीक

दवा को शरीर के अंदर इंजेक्ट किया जाता है, जहाँ वह चुपचाप ट्यूमर तक पहुँच जाती है। ​जब डॉक्टर ट्यूमर वाली जगह पर विशेष वेवलेंथ की लाल रोशनी डालते हैं, तो दवा सक्रिय हो जाती है। ​सक्रिय होते ही यह दवा 'डुअल अटैक' करती है (सिंगलेट ऑक्सीजन और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसे तत्व छोड़कर), जिससे कैंसर कोशिकाएं तेजी से नष्ट होने लगती हैं।

​इस बीमारियों में होगी कारगर

​शुरुआती शोध और परीक्षणों में यह तकनीक विशेष रूप से ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) और लिवर कैंसर (Liver Cancer) के ट्यूमर को खत्म करने में काफी प्रभावी पाई गई है। शरीर के स्वस्थ अंगों को सुरक्षित रखते हुए केवल कैंसर सेल्स को ही टारगेट किया जाएगा। यह शोध एम्स भोपाल के बायोकैमिस्ट्री विभाग द्वारा किया गया है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है।

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