AIIMS : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान (एम्स) दिल्ली में

एम्स दिल्ली में बढ़ेगी किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा, घटेगी वेटिंग

एम्स दिल्ली में बढ़ेगी किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा, घटेगी वेटिंग

AIIMS : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान (एम्स) दिल्ली में किडनी प्रत्यारोपण के लिए मरीजों की लंबी प्रतीक्षा सूची को देखते हुए इसकी क्षमता बढ़ाने का फैसला किया गया है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग से मंजूरी मिल गई है। एम्स दिल्ली में किडनी प्रत्यारोपण विगत 40 वर्षों से किया जा रहा है। अब तक यह जिम्मेदारी मुख्य रूप से जनरल सर्जरी विभाग संभालता रहा है पर अब अलग से न्यूरोलाजी विभाग ने यह स्वास्थ्य सेवा शुरु हुई है। 

डॉक्टरों के अनुसार, कई वर्ष पहले भी यूरोलॉजी विभाग में प्रत्यारोपण शुरू करने की कोशिश की गई थी, लेकिन सीमित संसाधन और ढांचागत कमी के कारण यह सुविधा नियमित रूप से शुरू नहीं हो पाई थी। पिछले दो-तीन वर्षों में एम्स में ढांचागत सुविधाओं में तेजी से विस्तार हुआ है। नया सर्जिकल ब्लॉक बनते ही जनरल सर्जरी विभाग वहां शिफ्ट हो गया, जिससे मुख्य अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर और वार्ड खाली हो गए।

इन्हीं संसाधनों को यूरोलॉजी विभाग को आवंटित किया गया, जिससे उसके लिए अलग से प्रत्यारोपण ऑपरेशन थियेटर और प्रत्यारोपण एचडीयू वार्ड की व्यवस्था आसानी से हो पाई। इन सुविधाओं के मिलने के बाद विभाग में नियमित प्रत्यारोपण शुरू हो सका है। सालभर में 300 से अधिक सर्जरी जनरल सर्जरी विभाग पहले से ही वर्ष भर में लगभग 150 मरीजों का प्रत्यारोपण करता है और हाल ही में विभाग ने रोबोटिक किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा भी शुरू की है। डॉक्टरों का कहना है कि सर्जरी ब्लॉक की क्षमता आने वाले समय में प्रत्यारोपण संख्या और बढ़ाने की अनुमति देती है।

सर्जरी की संख्या दोगुना से अधिक बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रहा

यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि एम्स में किडनी प्रत्यारोपण की क्षमता अगले वर्ष से बढ़ने जा रही है। फिलहाल विभाग हर महीने औसतन दो मरीजों का प्रत्यारोपण कर रहा है, जबकि पिछले एक वर्ष में उसने कुल 21 मरीजों को नई जिंदगी दी है। विभाग आगामी वर्ष में किडनी प्रत्यारोपण सर्जरी की संख्या दोगुना से अधिक बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। 

वर्तमान में अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण के लिए लगभग एक वर्ष की लंबी वेटिंग है। ऐसे में यूरोलॉजी विभाग का सक्रिय होना बड़ी राहत माना जा रहा है। विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि दो विभागों में समानांतर प्रत्यारोपण कार्यक्रम चलने से क्षमता दोगुनी होगी और लंबे समय से इंतजार कर रहे मरीजों को तेज राहत मिल सकेगी। ढांचागत सुविधाओं में तेजी से विस्तार प्रो. डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि अगले वर्ष यूरोलॉजी विभाग का लक्ष्य 50 से 100 प्रत्यारोपण तक पहुंचने का है और उसके बाद इसे बढ़ाकर 150 तक ले जाने की तैयारी है। यह बदलाव अचानक नहीं आया है।

ऐसे में दोनों विभागों के संयुक्त प्रयास से एम्स वर्ष में 300 से अधिक किडनी प्रत्यारोपण करने की क्षमता हासिल कर सकता है, जो राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि होगी। दिल्ली में सरकारी क्षेत्र में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा बेहद सीमित है। एम्स, सफदरजंग, आरएमएल ओर आईएलबीएस जैसे कुछ संस्थान ही यह सुविधा देते हैं।

यह भी पढ़ें : https://www.primenewsnetwork.in/india/akhilesh-yadav-said-big-slogans-like-digital-india-stand-up-india-were-given/100315