रायबरेली AIIMS का कमाल: तेजाब पीने से बंद हो गया था खाने का रास्ता, आधुनिक तकनीक से 16 वर्षीय किशोर को दी नई जिंदगी
रायबरेली {उत्तर प्रदेश}: एम्स रायबरेली के जनरल सर्जरी विभाग ने एक जटिल मामले में 16 वर्षीय किशोर की सफल सर्जरी की है। करीब चार महीने पहले गलती से तेजाब पीने के बाद किशोर के पेट के निचले हिस्से में गंभीर सिकुड़न हो गई थी, जिससे भोजन पेट से आगे आंतों तक नहीं पहुंच पा रहा था। लैप्रोस्कोपिक यानी की-होल विधि से की गई सर्जरी के बाद अब किशोर सामान्य रूप से मुंह से भोजन कर रहा है।
तेजाब पीने के बाद बिगड़ी स्थिति
मुरार मऊ, ऊंचाहार निवासी 16 वर्षीय सूर्यांश ने करीब चार महीने पहले गलती से तेजाब पी लिया था। इसके बाद उसके पेट के निचले हिस्से में अत्यधिक सिकुड़न (स्ट्रिक्चर) हो गई। इस वजह से भोजन पेट से आगे छोटी आंत तक नहीं पहुंच पा रहा था। स्थिति गंभीर होने के कारण सूर्यांश मुंह से भोजन करने में पूरी तरह असमर्थ हो गया था। पिछले कई महीनों से उसे पाइप के जरिए सीधे छोटी आंत में भोजन दिया जा रहा था।
27 जुलाई को हुई जटिल सर्जरी
एम्स रायबरेली के जनरल सर्जरी विभाग की यूनिट-1 ने 27 जुलाई 2026 को सूर्यांश की सर्जरी की। डॉक्टरों की टीम ने लैप्रोस्कोपिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पेट को छोटी आंत से जोड़ दिया। इस प्रक्रिया के बाद भोजन के रास्ते में आई रुकावट को दूर किया गया और पाचन मार्ग को सामान्य करने की कोशिश की गई।
अब सामान्य रूप से खा रहा खाना
सर्जरी के बाद सूर्यांश अब बिना किसी परेशानी के मुंह से खाना खा रहा है। उसके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है और उसका वजन भी बढ़ने लगा है। लंबे समय से बीमारी और उपचार से परेशान परिवार को भी राहत मिली है। एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. अमिता जैन ने इस सफलता के लिए पूरी चिकित्सा टीम की सराहना की। ऑपरेशन डॉ. नीरज कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में किया गया। सर्जिकल टीम में डॉ. प्रणभ कुशवाहा, डॉ. अमृतांशु सौरभ, डॉ. शिरीष कुमार, सीनियर रेजिडेंट डॉ. योगेश और जूनियर रेजिडेंट डॉ. हिमांशु शामिल रहे। एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. गिरीश, सीनियर रेजिडेंट डॉ. अंजू और जूनियर रेजिडेंट डॉ. देवी ने सहयोग किया। नर्सिंग ऑफिसर सुप्रिया और प्रिया ने भी सर्जरी के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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