राम गोविंद चौधरी के निधन पर अखिलेश यादव ने दी श्रद्धांजलि, बोले- महान समाजवादी प्रकाश-स्तंभ थे
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता विरोधी दल राम गोविन्द चौधरी के निधन पर समाजवादी पार्टी प्रदेश मुख्यालय लखनऊ के डॉ. राममनोहर लोहिया सभागार में शोकसभा हुई। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रामगोविन्द चौधरी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
अखिलेश ने बताया महान समाजवादी प्रकाश-स्तंभ
इस अवसर पर शोक प्रस्ताव रखा गया। उपस्थित सभी नेताओं, कार्यकर्ताओं ने रामगोविन्द चौधरी के निधन पर गहरा शोक जताते हुए 2 मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। अखिलेश यादव ने कहा कि अब हमारे बीच वो महान समाजवादी प्रकाश-स्तंभ राम गोविंद चौधरी नहीं रहे, जिन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी व समाजवादी मार्गदर्शक जय प्रकाश नारायण और भूतपूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की अगुवाई में समाजवादी मूल्यों, सिद्धांतों और लक्ष्यों की मशाल सदैव प्रज्ज्वलित रखी।
सामाजिक न्याय और जनपक्ष के लिए जीवनभर संघर्ष
उन्होंने कहा कि बलिया की क्रांतिकारी धरती से उठकर छात्र राजनीति के कठिन मार्ग से होते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तक उनकी आवाज और अकाट्य तर्कों का सदैव सम्मान हुआ। सामाजिक न्याय के पुरोधा के रूप में वो जीवन भर संघर्षरत रहे। उन्होंने जनपक्ष को हमेशा सबसे पहले और ऊपर रखा। विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने तब भी अपनी आवाज बुलंद रखी जब सदन में हमारे 50 विधायक भी नहीं थे।
जनता से जुड़ी राजनीति की मिसाल थे राम गोविंद
उन्होंने आगे कहा कि जब वो बोलते थे तो सदन उन्हें बड़ी शांति और शिद्दत के साथ सुनता था और उनके खर-प्रखर वाचन और सत्यनिष्ठता से सीख-सबक भी लेता था। उनकी जमीनी पकड़ और जनता से गहरे जुड़ाव के कारण वो स्वयं में सौहार्दपूर्ण सकारात्मक सामाजिक राजनीति की एक सक्रिय पाठशाला की तरह रहे। उन्होंने सांविधानिक, लोकतांत्रिक, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा व स्वतंत्रता, समता और व्यक्ति की गरिमा व प्रतिष्ठा के लिए हमेशा निर्भय होकर आंदोलित रहना सिखाया।
बड़ों के लक्ष्यों को पूरा करने का लिया संकल्प
यादव ने कहा कि एकसशक्त समाजवादी नेतृत्व के रूप में सपा में उनकी भूमिका सदैव एक दिग्दर्शक के रूप में रही। नेताजी और उनका साथ समाजवादी संकल्पों की पूर्ति के संघर्षों में सदैव एकजुट रहा। अब हम सबकी जिम्मेदारी है कि अपने उन ‘बड़ों के लक्ष्यों’ की पूर्ति में संपूर्ण समर्पण और संकल्प के साथ एकजुट होकर आगे बढ़ें, जो अब हमारे बीच सैद्धांतिक प्रेरणा मात्र ही विद्यमान हैं। पुनः पुनः भावभीनी श्रद्धांजलि।
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