अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला, कहा- 'कठपुतली' बनकर लोकतंत्र खत्म करने का रचा जा रहा षड्यंत्र
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने आयोग को सीधे तौर पर 'कठपुतली' करार देते हुए आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र को खत्म करने का बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है। यादव ने चुनाव आयुक्तों के आपसी विवाद और यूपी से लेकर बंगाल तक चुनाव प्रक्रिया में धांधली के गंभीर आरोप लगाए हैं।
लोकतंत्र को खत्म करने का षड्यंत्र
अखिलेश यादव ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि वर्तमान में चुनाव आयोग महज एक कठपुतली की तरह काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में होने वाले चुनावों में बड़े पैमाने पर बेईमानी हो रही है और आयोग अपनी साख खो चुका है। सपा अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा, "चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जिस तरह के सवाल उठ रहे हैं, वह लोकतंत्र के लिए घातक है।"
'मुख्य आयुक्त के फैसलों पर 14 आपत्तियां'
लखनऊ स्थित सपा प्रदेश मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अखिलेश ने हालिया रिपोर्ट्स का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह बेहद खतरनाक खबर है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के गलत फैसलों के खिलाफ दो चुनाव आयुक्तों ने दस महीनों में 14 बार नोट लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को न्यायपूर्ण तरीके से काम करने की आजादी न होना लोकतंत्र के लिए घातक है।
'सत्ता के लिए संविधान की उड़ीं धज्जियां'
संस्थाओं के पतन पर गहरी चिंता जताते हुए यादव ने कहा कि भाजपा सरकार में कोई भी संस्था निष्पक्ष नहीं रह गई है। उन्होंने सीधे तौर पर मांग की कि भविष्य के चुनाव वर्तमान आयोग के नेतृत्व में नहीं होने चाहिए। अखिलेश ने कहा, "सत्ता में बने रहने के लिए संविधान की धज्जियां उड़ायी गई है। लोकतंत्र में कठपुतली बनकर धोखा देना घोर संवैधानिक अपराध है।"
यूपी उपचुनाव और 2022 की धांधली
साल 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए सपा प्रमुख ने याद दिलाया कि कैसे सपा समर्थक मतदाताओं को चुन-चुन कर वोटर लिस्ट से हटाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग को बड़ी संख्या में हलफनामे देने के बावजूद किसी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा मीरापुर, कुन्दरकी, कानपुर, करहल, कटेहरी और मिल्कीपुर उपचुनावों में भी चुन-चुन कर अधिकारी तैनात करने और वोटों की खुली लूट का दावा किया गया।
बिहार से बंगाल तक 'लूट का मॉडल'
चुनाव प्रक्रिया में एसआईआर (SIR) हेरफेर को लेकर अखिलेश ने कहा कि जो मॉडल यूपी उपचुनावों में अपनाया गया, उसे ही पश्चिम बंगाल में तीन लाख केंद्रीय फोर्स लगाकर लागू किया गया। उन्होंने बिहार चुनावों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। लखनऊ और सुल्तानपुर का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे फर्जी हस्ताक्षर, प्रिंटेड फॉर्म और साजिश के जरिए आम लोगों के वोट काटे जाने का प्रयास हुआ।
प्रशासनिक फेरबदल और पीडीए का दांव
मौजूदा प्रशासनिक फेरबदल पर सवाल उठाते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि ट्रांसफर-पोस्टिंग पूरी तरह से चुनाव की तैयारियों के लिए हो रही है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव देखने वाले अधिकारियों में पीडीए (PDA) वर्ग का एक भी अधिकारी नहीं है। यादव ने चेतावनी दी कि यदि भाजपा नहीं हारी, तो यूपी का अगला चुनाव आखिरी चुनाव होगा।
'दिल्ली में पीडीए की सरकार बनाना ही विकल्प'
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में अखिलेश यादव ने साफ किया कि चुनाव आयोग पूरी तरह से एक्सपोज हो गया है और इसके साथ ही भाजपा की असलियत भी सामने आ गई है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, "लोकतंत्र बचाने का एक ही रास्ता है, दिल्ली में पीडीए की सरकार बनाना।" यादव ने दावा किया कि आने वाले समय में जनता अपने वोट से भाजपा को हमेशा के लिए हटा देगी और यहीं से इनका पतन शुरू होगा।
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