इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला: बालिग को धर्म और जीवनसाथी चुनने की पूरी स्वतंत्रता
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)। प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि बालिग व्यक्ति को अपनी अंतरात्मा के अनुसार धर्म चुनने और अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने का पूरा अधिकार प्राप्त है। अदालत ने कहा कि परिवार की असहमति मात्र इस संवैधानिक स्वतंत्रता पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं हो सकती। न्यायमूर्ति संदीप जैन ने एक हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई के दौरान 31 वर्षीय आयुष मलिक से बातचीत के बाद यह अहम टिप्पणी की।
याचिकाकर्ता आयुष मलिक का अदालत में बयान
सुनवाई के दौरान आयुष ने अदालत को अवगत कराया कि उसने वर्ष 2014 में अपनी इच्छा से इस्लाम धर्म अपनाया था और अब वह चांदनी कुरैशी के साथ विवाह करना चाहता है। उसने अदालत के समक्ष किसी भी प्रकार के दबाव, धमकी या प्रलोभन की बात से पूरी तरह इनकार किया। अदालत ने अनुच्छेद 25 के तहत मिलने वाली धार्मिक स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21 के तहत जीवनसाथी चुनने के अधिकार को व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वायत्तता का मुख्य हिस्सा बताया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी और याचिका का निस्तारण
अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह अपनी व्यक्तिगत धारणा किसी भी बालिग व्यक्ति पर नहीं थोप सकती। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने आयुष को पूरी स्वतंत्रता दी कि वह अपनी इच्छा के अनुसार रह सके, अपने धर्म का पालन करे और कानून के दायरे में रहकर विवाह के संबंध में खुद निर्णय ले सके। इसी के साथ अदालत ने इस याचिका का निस्तारण कर दिया।
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