इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- हथियारों का प्रदर्शन समाज में डर बढ़ाता है
प्रयागराज। Allahabad High Court ने सरकार को आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को हथियार लाइसेंस देने की नीति पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि आत्मरक्षा के नाम पर खुलेआम हथियार रखना अक्सर सुरक्षा नहीं बल्कि समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है।
“हथियार शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बन रहे”
न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया हथियार शक्ति प्रदर्शन और सुरक्षा का भ्रम पैदा करने वाले उपकरण बन गए हैं, जो सामाजिक सद्भाव को प्रभावित करते हैं। अदालत ने कहा कि आत्मरक्षा के नाम पर बंदूकें लेकर घूमना कई बार धमकी और दबाव का साधन बन जाता है, जिससे समाज में डर का माहौल पैदा होता है।
“भय नहीं, सुरक्षा होनी चाहिए उद्देश्य”
अदालत ने स्पष्ट कहा कि आत्मरक्षा का वास्तविक उद्देश्य जीवन की रक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना है, न कि प्रभुत्व स्थापित करना। न्यायालय के अनुसार, ऐसा समाज जहां लोग हथियारों के दम पर प्रभाव दिखाते हैं, वहां जनविश्वास कमजोर होता है और नागरिक शांति प्रभावित होती है।
सभी जिलों को दिए सख्त निर्देश
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति Vinod Diwakar ने राज्य के सभी 75 जिलों के जिला मजिस्ट्रेटों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को शस्त्र लाइसेंस जारी करने और नवीनीकरण के दौरान कानून का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि आपराधिक इतिहास वाले व्यक्तियों को लाइसेंस देने की नीति की समीक्षा जरूरी है।
कोर्ट में पेश हुए चौंकाने वाले आंकड़े
अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) द्वारा दाखिल हलफनामे में बताया गया कि उत्तर प्रदेश में कुल 10 लाख 8 हजार 953 शस्त्र लाइसेंस जारी हैं।
आंकड़ों के अनुसार—
- 20,960 परिवारों के पास एक से अधिक हथियार लाइसेंस हैं।
- 6,062 आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को भी शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए हैं।
- विभिन्न श्रेणियों के 23,407 आवेदन लंबित हैं।
- जिला मजिस्ट्रेटों के आदेशों के खिलाफ 1,738 अपीलें आयुक्तों के पास लंबित हैं।
अगली सुनवाई 26 मई को
अदालत ने सरकार से लाइसेंस धारकों के सही पते और क्षेत्रवार जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। साथ ही पूर्व आदेशों के अनुपालन की रिपोर्ट भी मांगी गई है। मामले की अगली सुनवाई 26 मई को होगी।
ANI
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