हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा, केवल

विवाह का वादा टूटने से नहीं बनता रेप का केसः इलाहाबाद हाईकोर्ट

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इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)। हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि यदि किसी व्यक्ति ने विवाह का वादा किया हो और बाद में वह पूरा न कर पाए, तो केवल इस आधार पर रेप का केस नही किया जा सकता। अदालत ने संजय सरोज नामक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे को समाप्त करते हुए उसके विरुद्ध जारी चार्जशीट और समन आदेश रद्द कर दिए हैं।

दस्तावेजों और परिस्थितियों को देखने के बाद लिया फैसला

अदालत ने कहा कि मामले के दस्तावेजों और परिस्थितियों को देखने पर यह प्रतीत होता है कि दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से संबंध बना था। बाद में दोनों के बीच संबंध बिगड़ गए, जिससे झगड़ा हुआ, यह आपराधिक मुकदमा नहीं बनता।

महिला का आरोप, आरोपी ने शादी करने का दिया था भरोसा 

शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने शादी करने का भरोसा देकर वर्षों तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इसी कारण वर्ष 2019 में उसने  प्रयागराज के कर्नलगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी, जिसमें रेप सहित अन्य आरोप लगाए थे।

दोनों लगभग पांच साल तक एक-दूसरे के संपर्क में थे

हालांकि, सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि दोनों लगभग पांच साल तक एक-दूसरे के संपर्क में थे और इस दौरान आपसी सहमति से संबंध भी बनाया। न्यायालय ने यह भी कहा कि शिकायत में कथित घटनाओं का पर्याप्त और स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया था। इसके अलावा, लंबे समय तक किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई न किया जाना भी मामले की परिस्थितियों को प्रभावित करता है।

विवाह का आश्वासन छलपूर्वक देने पर ही होगा रेप का केस 

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि रेप का आरोप तभी टिक सकता है जब यह साबित हो कि शुरुआत से ही विवाह का आश्वासन छलपूर्वक दिया गया था और आरोपी का विवाह करने का कोई वास्तविक इरादा नहीं था। केवल बाद में शादी न होना या संबंध टूट जाना पराध नहीं है।

दोनों ने अगस्त 2019 में कर लिया था विवाह 

अदालत ने यह भी कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद दोनों पक्षों ने अगस्त 2019 में विवाह कर लिया था। जिस कारण यह केस पूर्ण रूप से निराधार हो जाता है। इन सभी तथ्यों और कानूनी सिद्धांतों पर विचार करने के बाद अदालत ने आरोपी के खिलाफ चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने का आदेश दिया।

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