अमरनाथ यात्रा: जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की मॉक ड्रिल तेज, आतंकी हमलों और आपदा से निपटने के लिए सुरक्षा चक्र तैयार
श्रीनगर (जम्मू और कश्मीर): आगामी 3 जुलाई से शुरू होने जा रही वार्षिक अमरनाथ यात्रा के सुरक्षित और सुचारू संचालन के लिए जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों और नागरिक प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने और एजेंसियों के बीच तालमेल को परखने के लिए पूरे केंद्र शासित प्रदेश में मॉक ड्रिल तेज कर दी गई हैं।
संवेदनशील स्थानों पर मॉक ड्रिल
यह मॉक ड्रिल अमरनाथ यात्रा के दोनों पारंपरिक मार्गों (पहलगाम और बालटाल) के अलावा प्रमुख शिविरों, बेस कैंपों और संवेदनशील स्थानों पर किए जा रहे हैं। इसमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना, स्वास्थ्य सेवाएं, अग्निशमन विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें संयुक्त रूप से हिस्सा ले रही हैं। इस ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आतंकी हमलों, आईईडी खतरों, प्राकृतिक आपदाओं, आगजनी और भीड़ प्रबंधन जैसी विपरीत परिस्थितियों में क्विक रिसपॉन्स टाइम और निकासी प्रक्रियाओं का मूल्यांकन करना है।
खुफिया इनपुट के आधार पर 'थ्री-टियर' सुरक्षा व्यवस्था
CRPF की 46वीं बटालियन के कमांडेंट देवेंद्र पाल ने बताया कि इस बार अमरनाथ यात्रा करीब 57-58 दिनों की है। खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट और संभावित खतरों के आधार पर सुरक्षा को तीन स्तरों में बांटा गया है। जम्मू से पहलगाम और बालटाल तक जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों और संबद्ध सड़कों को पूरी तरह सुरक्षित किया गया है। भीतरी इलाकों (हिंटरलैंड) की सुरक्षा ग्रिड को मजबूत किया गया है। ऊंची पहाड़ियों पर बने सामरिक परिचालन अड्डों को सुरक्षा घेरे से जोड़ा गया है।
28 अगस्त को रक्षाबंधन पर यात्रा का होगा समापन
दक्षिण कश्मीर के हिमालय में लगभग 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा मंदिर की यात्रा देश की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक तीर्थयात्राओं में से एक है। इस वर्ष 57 दिनों की यह यात्रा अनंतनाग जिले के नुनवान-पहलगाम मार्ग (48 किमी) और गांदरबल जिले के बालटाल मार्ग (14 किमी) से एक साथ शुरू होगी, जिसका समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर होगा। शांतिपूर्ण यात्रा सुनिश्चित करने के लिए ड्रोन निगरानी, तोड़फोड़-रोधी जांच और त्वरित प्रतिक्रिया टीमों को चौबीसों घंटे तैनात रखा जाएगा।