SIR विवाद के बीच उमर अब्दुल्ला ने इंडिया ब्लॉक के प्रदर्शन का किया समर्थन
श्रीनगर: जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को मतदाता सूची संशोधन और मतदाताओं के नाम कथित रूप से हटाए जाने के विरोध में चुनाव आयोग के खिलाफ इंडिया ब्लॉक के सांसदों के प्रदर्शन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन ने चुनाव आयोग तक मार्च के साथ शुरू होने वाली कार्रवाई का कार्यक्रम तैयार कर लिया है। उमर अब्दुल्ला ने कहा, पिछले कुछ दिनों में हुई इंडिया ब्लॉक की बैठक में एक कार्यक्रम तैयार किया गया। इसकी शुरुआत सांसदों के चुनाव आयोग तक मार्च से हुई और यह जारी रहेगा।
SIR के बीच उमर अब्दुल्ला ने मतदाता नाम हटने पर जताई चिंता
उनकी यह टिप्पणी मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) और मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों के खिलाफ नई दिल्ली में इंडिया ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन के बीच आई है। विपक्षी दल मतदाता सूची संशोधन के मामले में चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं और प्रक्रिया की गहन जांच की मांग कर रहे हैं। विपक्षी सांसद मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पर चिंता जताते हुए और चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग करते हुए अपनी कार्रवाई के तहत चुनाव आयोग की ओर मार्च कर रहे हैं। इस मुद्दे पर बोलते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वोटों को रद्द करने को लेकर पहले भी चिंताएं जताई गई थीं, लेकिन उस समय उन पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया था।
उमर अब्दुल्ला ने कोर्ट के फैसले का इंतजार करने की बात कही
उन्होंने कहा, इस मुद्दे को पहले भी उठाया गया था, लेकिन कुछ ही लोगों ने सुना। अब सुप्रीम कोर्ट वोटों को रद्द करने पर सवाल उठा रहा है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही का इंतजार करेगा और देखेगा कि वोटों को रद्द करने के मामले में क्या फैसला होता है। उन्होंने कहा, हम देखेंगे कि अदालत में इस मामले को कैसे निपटाया जाता है। इंडिया ब्लॉक की कई पार्टियों के नेताओं ने मार्च में हिस्सा लिया और अपनी चिंताएं व्यक्त कीं। यह विरोध प्रदर्शन विपक्ष द्वारा घोषित व्यापक "लोकतंत्र बचाओ" अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत विपक्ष के नेता चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।
SIR पर EC के दो आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद
यह नया विवाद इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट से उपजा है, जिसमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 14 आपत्तियां उठाई थीं। चुनाव आयोग का कहना है कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। विपक्षी नेताओं ने फॉर्म 6 में किए गए संशोधन पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा था कि उसने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान नए मतदाताओं के नामांकन के लिए फॉर्म 6 के किसी भी संशोधित संस्करण के उपयोग को मंजूरी नहीं दी है।
(इनपुट: ANI)
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