अंकिता भंडारी केस: दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति के विरोध में उतरी कांग्रेस, गोदियाल करेंगे मौन उपवास
देहरादून (उत्तराखंड) [भारत]: उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (यूकेपीसीसी) के अध्यक्ष और कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य गणेश गोदियाल ने मंगलवार को देहरादून में एक घंटे के मौन उपवास की घोषणा की। यह विरोध सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत गौतम की नियुक्ति को लेकर है। अंकिता भंडारी के माता-पिता ने उनकी कथित हत्या के मामले में एक वीआईपी का जिक्र किया था, जिसे लेकर यह विवाद फिर चर्चा में आ गया है।
दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर कांग्रेस ने जताया विरोध
सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में गणेश गोदियाल ने कहा कि दुष्यंत गौतम की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति से उत्तराखंड के आम लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा, “अंकिता भंडारी हत्याकांड में अंकिता भंडारी के माता-पिता द्वारा स्पष्ट रूप से नामित वीआईपी को राज्यपाल नियुक्त करना उत्तराखंड के आम लोगों की भावनाओं को गहरा ठेस पहुंचाने के समान है।” गोदियाल ने सीबीआई जांच को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में अब तक कोई खास प्रगति नहीं हुई है और नामजद आरोपियों के खिलाफ सीबीआई ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है। उन्होंने कहा, “सीबीआई जांच में एक इंच भी प्रगति नहीं हुई है और सीबीआई ने नामजद आरोपियों के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है। ऐसे व्यक्ति को राज्यपाल पद पर नियुक्त करना अत्यंत आपत्तिजनक है।”
गांधी पार्क में एक घंटे का मौन उपवास करेंगे गोदियाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने विरोध प्रदर्शन की घोषणा करते हुए बताया कि वह देहरादून के गांधी पार्क में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने एक घंटे का मौन उपवास करेंगे। उन्होंने कहा, “इसलिए, कल दोपहर 12 बजे, मैं देहरादून के गांधी पार्क में गांधी प्रतिमा के सामने एक घंटे का मौन व्रत रखूंगा, जो एक प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन होगा।”
कौन हैं दुष्यंत गौतम?
सोमवार को दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया। वह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने दिल्ली नगर निगम में पार्षद और राज्यसभा सदस्य के रूप में भी काम किया है। गौतम भाजपा में कई संगठनात्मक पदों पर रहे हैं और अनुसूचित जाति समुदायों से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों और पहलों में उनकी भूमिका रही है।
क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?
यह विवाद उत्तराखंड में एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या से जुड़ा है। सितंबर 2022 में उसका शव एक नहर से बरामद किया गया था। मामले में आरोप लगाया गया था कि पूर्व भाजपा नेता के बेटे पुलकित आर्य द्वारा संचालित रिसॉर्ट में अंकिता पर मेहमानों को यौन सेवाएं देने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। इस मामले में रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को पहले ही आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।
वीआईपी एंगल को लेकर फिर तेज हुई चर्चा
जनवरी 2026 में एक अज्ञात वीआईपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला दोबारा सुर्खियों में आया। वीआईपी की कथित संलिप्तता को लेकर लगाए गए आरोपों और सोशल मीडिया पर वायरल हुए ऑडियो-वीडियो क्लिप के बाद इस मामले में जांच की मांग तेज हुई। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 9 जनवरी 2026 को मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी विशेष अपराध शाखा के माध्यम से मामला दर्ज किया।
सीबीआई ने अपने कब्जे में लिए मामले से जुड़े दस्तावेज
सीबीआई ने मामले से संबंधित रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। इनमें विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट, पुलिस एफआईआर और अन्य दस्तावेज शामिल हैं। एजेंसी द्वारा एफआईआर दर्ज कराने वाले डॉ. अनिल प्रकाश जोशी का बयान भी दर्ज किए जाने की उम्मीद है। यह घटनाक्रम उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में अंकिता भंडारी हत्याकांड के कथित वीआईपी एंगल की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद सामने आया है।
(एएनआई)
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