प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर भड़के शिक्षाविद, IIT मद्रास निदेशक कामाकोटी से जुड़े बयान पर मांगी माफी
नई दिल्ली: आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी को लेकर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की टिप्पणी पर देशभर के कुलपतियों, पूर्व कुलपतियों और वरिष्ठ शिक्षाविदों ने नाराजगी जताई है। शिक्षाविदों ने प्रियंका गांधी से बयान के लिए माफी मांगने और भविष्य में ऐसी टिप्पणियां नहीं दोहराने की अपील की है।
खुले पत्र में जताई नाराजगी
देशभर के विश्वविद्यालयों के प्रमुखों और शिक्षाविदों द्वारा हस्ताक्षरित एक खुले पत्र में प्रियंका गांधी पर लोकसभा में चर्चा के दौरान प्रोफेसर कामाकोटी को कथित तौर पर "गौमूत्र विशेषज्ञ" कहने का आरोप लगाया गया है। पत्र में कहा गया कि इस तरह की टिप्पणी वैज्ञानिक और शैक्षणिक समुदाय की गरिमा को प्रभावित करती है।
शिक्षाविदों ने मांगी सार्वजनिक माफी
वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. किशोरसिंह चावड़ा ने कहा कि इस टिप्पणी से शिक्षण समुदाय आहत हुआ है। उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं और शिक्षकों के सम्मान को बनाए रखना जरूरी है और प्रियंका गांधी को अपने शब्दों के लिए माफी मांगनी चाहिए। दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय के अध्यक्ष के.के. अग्रवाल ने कहा कि प्रोफेसर कामाकोटी की परीक्षा संचालन और शिक्षा क्षेत्र में विशेषज्ञता को देखते हुए संसद में उनके खिलाफ ऐसी टिप्पणी करना उचित नहीं है।
कामाकोटी की उपलब्धियों का दिया हवाला
शहडोल विश्वविद्यालय के कुलपति शंभू नाथ दुबे ने कहा कि प्रोफेसर कामाकोटी की शैक्षणिक और शोध उपलब्धियों को देखते हुए यह टिप्पणी अनुचित और उपहासपूर्ण लगती है। आईआईटी गांधीनगर के निदेशक डॉ. रजत मूना ने भी प्रोफेसर कामाकोटी का समर्थन करते हुए कहा कि वे कंप्यूटर विज्ञान के प्रतिष्ठित प्रोफेसर हैं और उन्होंने रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स समेत कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
संसदीय चर्चा तथ्यों पर आधारित होने की अपील
बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अखिल रंजन गर्ग ने कहा कि संसद में किसी भी व्यक्ति को लेकर चर्चा तथ्यों और तर्कों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रोफेसर कामाकोटी को औद्योगिक स्तर के माइक्रोप्रोसेसर के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है और उन्होंने कई शोध पत्र प्रकाशित किए हैं। जम्मू स्थित क्लस्टर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर के.एस. चंद्रशेखर ने भी कहा कि प्रोफेसर कामाकोटी की योग्यता और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में योगदान पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी भी टिप्पणी से पहले राजनेताओं को उसके प्रभाव का आकलन करना चाहिए।
प्रियंका गांधी के बयान पर विवाद
दरअसल, लोकसभा में परीक्षा सुधारों पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने केंद्र द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति का जिक्र करते हुए कहा था कि इसमें एक पूर्व आईबी प्रमुख, एक आईटी कंपनी के मालिक और एक "गौमूत्र विशेषज्ञ" शामिल हैं। प्रोफेसर वी. कामाकोटी इसी समिति के सदस्य हैं। शिक्षाविदों ने अपने खुले पत्र में कहा कि यह टिप्पणी चाहे व्यंग्य के रूप में की गई हो या राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर, लेकिन इससे वैज्ञानिक अनुसंधान और शैक्षणिक जगत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है।
(एएनआई)
यह भी पढ़े: पालम अग्निकांड जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, MCD और फायर विभाग की लापरवाही उजागर; 9 लोगों की मौत