बाढ़ और सूखे से निपटने के लिए औरंगाबाद प्रशासन अलर्ट, प्रभारी मंत्री रमा निषाद ने की तैयारियों की समीक्षा
औरंगाबाद: समाहरणालय स्थित योजना भवन के सभा कक्ष में आज संभावित बाढ़ एवं सुखाड़-2026 की पूर्व तैयारी को लेकर जिला स्तरीय समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बिहार सरकार की पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की मंत्री सह जिला प्रभारी मंत्री रमा निषाद ने की। बैठक की शुरुआत जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा द्वारा प्रभारी मंत्री को पौधा भेंट कर स्वागत के साथ हुई। इसके बाद जिला पदाधिकारी ने जिले में संभावित बाढ़ एवं सुखाड़ से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा की गई तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिले में पुनपुन, सोन, बटाने, बतरे, अदरी एवं केसहर प्रमुख नदियां हैं। वहीं वर्ष 2021 से 2025 तक सामान्य से कम वर्षापात दर्ज किया गया है। बिहार मौसम सेवा केन्द्र के पूर्वानुमान के अनुसार वर्ष 2026 में जून से सितंबर तक सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन को लेकर व्यापक तैयारियां की हैं। सभी प्रखंडों में वर्षा मापक यंत्र एवं स्वचालित मौसम केंद्र सक्रिय हैं। बाढ़ राहत सामग्री, पॉलीथीन शीट, नाव, सामुदायिक रसोई, राहत शिविर, चिकित्सा दल, पशु चिकित्सा दल, पेयजल, खाद्यान्न एवं आपदा नियंत्रण कक्ष को अद्यतन रखा गया है।
प्रशासन के अनुसार, जिले में फिलहाल 1429 पॉलीथीन शीट उपलब्ध हैं तथा अतिरिक्त पॉलीथीन शीट की मांग नोडल जिला गया से की गई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के लिए 11 निजी नावों के साथ एकरारनामा किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर गया एवं बिहटा, पटना से SDRF और NDRF की टीमों की तैनाती की जाएगी। जिला आपदा प्रबंधन शाखा में जिला आपातकालीन संचालन केंद्र 24 घंटे कार्यरत है। राहत शिविरों एवं सामुदायिक रसोई संचालन के लिए 86 स्थलों का चयन किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने संभावित बाढ़, सुखाड़ एवं महामारी से निपटने के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध कराए हैं। वहीं पशुपालन विभाग ने पशु चिकित्सा दल का गठन कर चारा व्यवस्था सुनिश्चित की है। कृषि विभाग द्वारा आकस्मिक फसल योजना तैयार कर राज्य मुख्यालय भेजी गई है। मानसून में देरी या कम बारिश की स्थिति में किसानों को वैकल्पिक फसल एवं अल्प अवधि वाली धान प्रजातियों की खेती के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा।
जल संसाधन विभाग नहरों की मरम्मत, तटबंधों की सुरक्षा और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने में जुटा है। वहीं पथ निर्माण विभाग द्वारा सड़कों एवं पुल-पुलियों की मरम्मत और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त की गई है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने हर घर नल का जल योजना के तहत अधिकांश योजनाओं को पूरा कर लिया है। साथ ही जल संकट की स्थिति में टैंकरों के जरिए पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है। नगर निकायों द्वारा भी जलजमाव, पेयजल संकट एवं भीषण गर्मी से राहत के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
बैठक में प्रभारी मंत्री रमा निषाद ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि संभावित बाढ़, सुखाड़ एवं भीषण गर्मी को देखते हुए पूरी सतर्कता और समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अंचल अधिकारियों एवं संबंधित विभागों को संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी रखने, राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा आमजन को जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। मंत्री ने कहा कि आपदा की स्थिति में त्वरित राहत पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग को दवाओं एवं चिकित्सकीय दल की उपलब्धता सुनिश्चित रखने, कृषि विभाग को किसानों को समय पर सलाह देने, जल संसाधन विभाग को तटबंधों की निगरानी जारी रखने तथा नगर निकायों को जल निकासी एवं पेयजल व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश भी दिए गए। इस दौरान आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा बाढ़ सुरक्षा सप्ताह, नुक्कड़ नाटक, फेसबुक लाइव, प्रकाश उत्सर्जक वाहन एवं जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से चलाए जा रहे अभियान की जानकारी भी साझा की गई।
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