औरंगाबाद में जर्जर बांस के पुल से नदी में गिरी 17 वर्षीय छात्रा, डूबने से गई जान
औरंगाबाद (बिहार)। रफीगंज प्रखंड के मंजखड़-बलिगांव स्थित केशहर नदी पर बना बांस का जर्जर चचरी पुल शुक्रवार को एक 17 वर्षीय बेटी की जिंदगी लील गया। यह हादसा नहीं, सरकारी व्यवस्था की अनदेखी का नतीजा है, जिसकी कीमत गरीब परिवार की बेटी ने अपनी जान देकर चुकाई है।
बांस के चचरी पुल को पार करने के दौरान तीनों का पैर फिसला
मृतका की पहचान शैलोपुर गांव निवासी दीपू साव की 17 वर्षीय पुत्री ब्यूटी कुमारी के रूप में हुई है। बताया जाता है कि ब्यूटी कुमारी ट्यूशन पढ़ती थी। शुक्रवार को वह अपनी मां शोभा देवी और बहन काजल कुमारी के साथ बालीगांव बाजार खरीदारी करने गई थी। वापसी के दौरान मंजखड़ गांव के पास केशहर नदी पर बने बांस के चचरी पुल को पार करने के दौरान तीनों का पैर फिसल गया और वे तेज बहाव में गिर पड़ीं।
खेतों में काम कर रहे ग्रामीण ने माँ और एक बेटी को बचाया
तीनों की चीख-पुकार सुनकर आसपास खेतों में काम कर रहे ग्रामीण दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए मां शोभा देवी और छोटी बेटी काजल को तो सकुशल बचा लिया, लेकिन ब्यूटी देखते ही देखते तेज धारा में बह गई।
20 घंटे तक नहीं पहुंची NDRF/SDRF, ग्रामीण रातभर खोजते रहे
हादसे की सूचना रफीगंज थाना पुलिस को दी गई। पुलिस ने स्थानीय गोताखोरों से तलाश शुरू कराई और इसकी सूचना SDRF को दी, लेकिन आरोप है कि 20 घंटे तक NDRF और SDRF की टीम मौके पर नहीं पहुंची। पूरी रात ग्रामीण टॉर्च की रोशनी में ब्यूटी को नदी में खोजते रहे। शनिवार सुबह उसका शव बरामद हुआ। दीपू साव इलेक्ट्रॉनिक ऑटो चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। बेटी के शव मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। नदी किनारे सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी।
उठ रहे सवाल - क्या गरीब की जान की कोई कीमत नहीं?
स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि वर्षों से यहां पक्का पुल की मांग की जा रही है, लेकिन प्रशासन कुंभकर्णी नींद में है। हर साल बारिश में यह चचरी पुल मौत का जाल बन जाता है। मांग की जा रही है कि जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग तत्काल मृतका के परिजनों को 4 लाख रुपये का मुआवजा दे, इस घोर लापरवाही पर जवाबदेही तय हो और केशहर नदी पर अविलंब पक्का पुल का निर्माण कराया जाए।
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