अयोध्या: राम जन्मभूमि को मिला FSSAI का 'ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप' टैग, नवरात्रि पर उमड़े श्रद्धालु
अयोध्या (उत्तर प्रदेश)। अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा 'ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप' (Eat Right Place of Worship) के रूप में प्रमाणित किया गया है। यह प्रमाण पत्र मंदिर परिसर में FSSAI द्वारा निर्धारित खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के कड़े मानकों को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद प्रदान किया गया है।
अयोध्या में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रजित पुन्हानी ने यह सर्टिफिकेट सौंपा। यह प्रमाण पत्र अगले दो वर्षों की अवधि के लिए मान्य रहेगा।
रामकोट परिक्रमा और नवरात्रि पर भक्तों का सैलाब
इसी दौरान, श्री राम जन्मभूमि मंदिर के ट्रस्टी महंत दिनेन्द्र दास ने जारी रामकोट परिक्रमा और शारदीय नवरात्रि की शुरुआत के साथ श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या पर जानकारी साझा की। महंत दिनेन्द्र दास ने बताया, "रामकोट परिक्रमा पिछले लगभग डेढ़ से दो वर्षों से निरंतर आयोजित हो रही है, जो विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है।"
उन्होंने कहा कि रविवार को सुल्तानपुर और बस्ती जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिक्रमा करने और प्रभु राम लला के दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया, "आज सुल्तानपुर और बस्ती से कई लोग परिक्रमा करने और राम लला का आशीर्वाद लेने आए। आज से नवरात्रि का पर्व शुरू होने के साथ ही मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गई है।"
वैष्णो देवी और सुकराला माता मंदिर में दिव्य माहौल
नवरात्रि के पावन अवसर पर रविवार तड़के से ही देशभर के प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े।
जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल कटरा में उत्सव जैसा माहौल देखा गया, जहां श्री माता वैष्णो देवी के आधार शिविर में श्रद्धालुओं का भारी तांता लगा। यात्रा की शुरुआत के मुख्य बिंदु 'दर्शनी ड्योढ़ी' पर पहाड़ी रास्ते पर चढ़ाई के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें नजर आईं। त्रिकूट पहाड़ियों के बीच स्थित श्री माता वैष्णो देवी भवन को भव्य रोशनी से सजाया गया है, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा है।
इसी तरह की अपार श्रद्धा कठुआ जिले के बिल्लावर स्थित ऐतिहासिक सुकराला माता मंदिर में भी देखने को मिली, जहां तड़के से ही विशाल जनसमूह एकत्र हुआ। मंदिर परिसर को ताज़े फलों और सुगंधित फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था। भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रशासन ने बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था और व्यापक नागरिक सुविधाएं प्रदान की हैं।
सनातन परंपरा में नवरात्रि का महत्व
हिंदू धर्म परंपरा में वर्ष भर में चार नवरात्रि मनाई जाती हैं, जिनमें से मुख्य रूप से दो—चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि—का उत्सव बड़े पैमाने पर मनाया जाता है, क्योंकि ये ऋतु परिवर्तन के समय आती हैं। देश भर में नवरात्रि का पर्व विभिन्न क्षेत्रीय सांस्कृतिक पद्धतियों के साथ मनाया जाता है।
नौ दिनों तक चलने वाला यह पावन पर्व, जिसे 'राम नवरात्रि' भी कहा जाता है, भगवान श्री राम के जन्मोत्सव यानी 'राम नवमी' के दिन संपन्न होता है। नवरात्रि के सभी नौ दिन आद्यशक्ति देवी दुर्गा के नौ विभिन्न स्वरूपों (नवदुर्गा) की आराधना के लिए समर्पित होते हैं, जिन्हें पूरे देश में अगाध श्रद्धा और वैदिक अनुष्ठानों के साथ मनाया जाता है। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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