सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस के द

गंगा में नाव पर चिकन-शराब पार्टी मामले के पांचों आरोपी जमानत पर रिहा

Bail Granted to All Accused in Ganga river Party Controversy

वाराणसी,(उत्तर प्रदेश): गंगा नदी के बीच नाव पर चिकन पकाने और शराब पार्टी करने के मामले में गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों को अदालत से जमानत मिल गई है। सोशल मीडिया पर विडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने धार्मिक भावनाएं आहत करने समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया था। अब कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत ने उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।

सोमवार शाम सोशल मीडिया पर हुआ था विडियो वायरल

सोमवार शाम सोशल मीडिया पर एक विडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें कुछ युवक गंगा नदी के बीच नाव पर चिकन बनाते और शराब व बीयर पार्टी करते दिखाई दे रहे थे। विडियो सामने आने के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिली। इसके बाद दशाश्वमेध पुलिस ने विडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की और सर्विलांस की मदद से दीपक कुमार, अजय साहनी, अरुण कुमार साहनी, अनुराग निषाद और राहुल साहनी को गिरफ्तार कर लिया। सभी आरोपी रामनगर क्षेत्र के निवासी बताए गए हैं और नाव चलाकर जीविकोपार्जन करते हैं।

बुधवार को कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने दी जमानत

बुधवार को कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत ने सभी पांच आरोपियों को 20-20 हजार रुपये के दो-दो जमानतदार और निजी मुचलका प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान आरोपियों की नाव को भी जब्त कर लिया था।

वायरल वीडियो के आधार पर मुकदमा दर्ज

दशाश्वमेध के एसीपी अतुल अंजान त्रिपाठी ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर चौकी प्रभारी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि आरोपियों में शामिल एक युवक ने ही पार्टी का वीडियो बनाया था और उसमें मौजूद सभी लोगों का परिचय भी दिया था। पुलिस के अनुसार यह वीडियो हाल का नहीं बल्कि करीब छह महीने पुराना, सर्दियों के समय का है, जो सोमवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।

इससे पहले भी गंगा नदी में नाव पर पार्टी का विडियो हुआ था वायरल

गौरतलब है, कि इससे पहले 15 मार्च को भी गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी का एक विडियो सामने आया था। उस मामले में आरोप था, कि पार्टी के दौरान चिकन बिरयानी परोसी गई और खाने के अवशेष गंगा में फेंके गए। उस प्रकरण में पुलिस ने 14 लोगों को गिरफ्तार किया था। निचली अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद करीब दो महीने बाद सभी आरोपियों को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी।

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