बंगाल में कड़ाई के बाद बांग्लादेशियों की 'घर वापसी': पकड़े जाने के डर से हकीमपुर बॉर्डर पर उमड़ी भीड़
कोलकाता (पश्चिम बंगाल)। कोलकाता से करीब 90 किलोमीटर दूर उत्तर चौबीस परगना जिले के तहत हकीमपुर में उन लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो अवैध तरीके से बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल में आ गए और अब पकड़े जाने के भय से वापस बांग्लादेश जाना चाहते हैं। हकीमपुर में चेक पोस्ट है और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) तैनात है। वहां से बांग्लादेश जाया जाता है। राज्य सरकार की ओर से बांग्लादेशी घुसपैठियों को तलाश करने और उन्हें बांग्लादेश भेजने की मुहिम चलाने के बाद से बांग्लादेशी घुसपैठिए खुद बांग्लादेश जाने के लिए हकीमपुर पहुंच रहे हैं।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रहे थे घुसपैठिए
हकीमपुर पहुंचने वाले बांग्लादेशी घुसपैठी कोलकाता के विभिन्न क्षेत्रों और उपनगरों में रह कर मजदूरी कर जीवन यापन करते थे। कई बंग्लादेशी घुसपैठियों के पास आधार कार्ड, वोटर कार्ड जैसे कागजात भी है। उनका कहना है कि स्थानीय टीएमसी के नेताओं की मदद उन्होंने ये कागजात बना लिए है। जब से बांग्लादेशी घुसपैठियों की तलाश शुरू हुई है, उन्हें कभी भी पकड़े जाने का भय होने लगा। मकान मालिक ने भी कमरे से निकालना शुरू कर दिया।
बीएसएफ की निगरानी में वापसी जारी
हकीमपुर से मिली जानकारी के अनुसार पिछले चार दिन से हरेक दिन डेढ़-दो सौ की संख्या में बांग्लादेशी बीएसएफ की मदद से वाबस बांग्लादेश लौट रहे है। बांग्लादेश लौटने वाले बांग्लादेशी बीएसएफ को बांग्लादेश के अपने ठिकाने का बताते हैं और बांग्लादेश की सीमा पर तैनात पुलिस उसकी तहकीकात कर उन्हें वापस ले रही है।
राज्यभर में तेज हुई पहचान और धरपकड़
राज्य सचिवालय नबान्नो से मिली जानकारी के अनुसार विभिन्न जिलों में करीब दो हजार बांग्लादेशी घुसपैठियों की चिह्नित किया जा चुका है और उनकी धरपकड़ की जा रही है। मुर्शिदाबाद, मालदा, नदिया समेत बांग्लादेश की सीमा से सटे जिलों में होल्डिंग सेंटर खोल दिए गए हें जिनमें पकड़े गए बांग्लादेशी घुसपैठियों को रख कर उन्हें बीएसएफ के हवाले किया जाएगा।
वोटर लिस्ट और वीजा रिकॉर्ड की जांच
नबान्नों से मिली जानकारी के मुताबिक वोटर लिस्ट में जिनका नाम हटाया गया है, उनमें कौन बांग्लादेशी घुसपैठी हैं, इसकी जांच की जा रही है। यह भी पता किया जा रहा है कि जो बांग्लादेशी वीजा लेकर पश्चिम बंगाल आए, वे समय पर लौटे या नहीं। बांग्लादेशी होने के आरोप में जिन्हें पहले से गिरफ्तार किया गया और सजा मिली, वे जेल से छूटने के बाद कहां गए।
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