उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि बांस भारत की स

बांसकार समाज के हुनर को मिलेगा व्यापक बाजार, सरकार करेगी हरसंभव सहयोग: ब्रजेश पाठक

Banskar Community Skills to Get Wider Market Access

लखनऊ। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि बांस भारत की समृद्ध लोक परंपरा, संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अभिन्न हिस्सा रहा है। बांसकार समाज ने पीढ़ियों से अपनी मेहनत, हुनर और कारीगरी के माध्यम से इस परंपरा को जीवंत रखा है। आवश्यकता है कि इस पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़कर बांसकार समाज के लिए रोजगार एवं आर्थिक उन्नति के नए अवसर सृजित किए जाएं। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक बुधवार को लखनऊ में अखिल भारतीय बांसकार महासंघ के तत्वावधान में आयोजित ‘बांसकार समाज महासम्मेलन’ को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जन्म से लेकर जीवन के विभिन्न संस्कारों तक बांस का उपयोग हमारी सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। आज बदलते समय में बांस पारंपरिक उपयोग से आगे बढ़कर पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन का प्रभावी माध्यम बन सकता है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्लास्टिक पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती है और बांस इसका प्राकृतिक एवं पर्यावरण-अनुकूल विकल्प बन सकता है। बांस से बोतल सहित अनेक उपयोगी एवं आकर्षक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। देश और दुनिया में बांस आधारित उत्पादों की बढ़ती मांग बांसकार समाज की कारीगरी और क्षमता के लिए बड़ी संभावना है। 

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सरकार बांस के उपयोग को दे रही बढ़ावा

उन्होंने कहा कि केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार बांस के उपयोग को बढ़ावा देने तथा बांसकार समाज के पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार से जोड़ने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है। बांस आधारित उत्पादों और उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने से कारीगरों के लिए रोजगार, स्वरोजगार और आय के नए अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

बांस हमारी सांस्कृतिक विरासत 

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि बांसकार समाज की कारीगरी केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत भी है। इस विरासत को संरक्षित करते हुए नई पीढ़ी को इससे जोड़ना और कारीगरों को उचित बाजार उपलब्ध कराना आवश्यक है। सरकार की मंशा है कि परंपरागत हुनर रखने वाले कारीगरों को उनकी मेहनत और उत्पाद का उचित मूल्य मिले तथा वे आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि बांस का विस्तार पर्यावरण संरक्षण, पारंपरिक कारीगरी के संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण, तीनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। बांसकार समाज के हुनर को सही अवसर और व्यापक बाजार उपलब्ध कराकर उसे विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सामूहिक जिम्मेदारी है।

बांसकार समाज ने रखी मांगें 

सम्मेलन में बांसकार समाज की ओर से रखी गई विभिन्न मांगों और सुझावों का उल्लेख करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि समाज की समस्याओं एवं अपेक्षाओं को संबंधित पटल तक पहुंचाया जाएगा। नियमानुसार उनकी मांगों के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बांसकार समाज के हितों से जुड़े विषयों पर संबंधित विभागों के स्तर पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित कराने का प्रयास रहेगा।

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इनकी रही उपस्थिति

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, विधायक एवं अध्यक्ष, राज्य सफाई कर्मचारी आयोग डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल, असम के अध्यक्ष, राज्य सफाई कर्मचारी आयोग बैजनाथ बांसफोड़, पूर्व विधायक एवं अध्यक्ष, बांस शिल्प कला बोर्ड, मध्य प्रदेश घनश्याम पीरोनिया, प्रदेश अध्यक्ष, डॉ. अंबेडकर महासभा प्रमोद सरोज, मंत्री, डॉ. अंबेडकर महासभा ट्रस्ट अमरनाथ प्रजापति, परदेसी प्रसाद वर्मा सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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