5 हजार रुपये लेने के बाद भी नहीं हुआ दाखिल-खारिज, किसान ने अधिकारियों से मांगा न्याय
बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली जिला की मीरगंज तहसील में भ्रष्टाचार का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के नाम पर सरकारी कर्मचारियों द्वारा रिश्वत लेने और काम पूरा न करने का आरोप लगा है। पीड़ित किसान ने संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंचकर अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है।
एक साल से तहसील और चकबंदी विभाग के काट रहे चक्कर
श्यामपुर गांव निवासी किसान रोशन लाल ने शनिवार को 'संपूर्ण समाधान दिवस' में एडीएम न्यायिक देश दीपक सिंह को एक शिकायती पत्र सौंपा है। रोशन लाल का आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी प्रेमवती के नाम पांच बीघा जमीन खरीदी थी, जिसके दाखिल-खारिज के लिए वह पिछले एक साल से तहसील और चकबंदी विभाग के चक्कर काट रहे हैं।
रिश्वत लेकर भी काम कराने से कर दिया इंकार
पीड़ित किसान के अनुसार, दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी कराने के नाम पर संबंधित कर्मचारियों ने उनसे कुल पांच हजार रुपये की अवैध वसूली की थी। रुपये देने के बाद भी जब काफी समय तक काम नहीं हुआ, तो उन्होंने बार-बार विभाग के चक्कर काटे, लेकिन हर बार उन्हें केवल झूठे आश्वासन ही मिले। स्थिति तब और बिगड़ गई जब 29 जून को संबंधित कर्मचारियों ने काम करने से साफ इनकार कर दिया और उन्हें बैरंग लौटा दिया।
पीड़ित ने उच्च अधिकारियों का खटखटाया दरवाजा
लंबे समय से शोषण और सरकारी दफ्तरों की दौड़ से परेशान होकर रोशन लाल ने अब उच्च अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया है। अपनी शिकायत में उन्होंने मांग की है कि रिश्वत के रूप में ली गई उनकी मेहनत की कमाई वापस कराई जाए और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई हो। साथ ही उन्होंने अपनी जमीन के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने की मांग की है।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीएम न्यायिक ने पीड़ित को आश्वासन दिया है कि शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और नियमानुसार दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ये भी पढे़ं- वृंदावन में केवल 2700 पंजीकृत ई-रिक्शों को ही संचालन की होगी अनुमति