बड़वानी में एकलव्य स्कूल के सैकड़ों छात्रों का प्रदर्शन, जातिसूचक टिप्पणी समेत कई शिकायतों पर जांच शुरू
बड़वानी (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में जामली स्थित सरकारी एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के सैकड़ों छात्र सोमवार को अपनी शिकायतें लेकर जिला मुख्यालय की ओर पैदल निकल पड़े। छात्रों ने करीब 15-16 किलोमीटर का सफर तय किया और साफ कहा कि वे सिर्फ कलेक्टर जयति सिंह से मिलकर अपनी समस्याएं सामने रखेंगे। छात्रों ने इस दौरान आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुछ देर रास्ता भी रोका और सड़क पर बैठकर मांग की कि कलेक्टर को मौके पर बुलाया जाए। प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने छात्रों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी मांग पर कायम रहे।
हाईवे पर भी जताया विरोध
जिला मुख्यालय की ओर बढ़ रहे छात्रों ने कुछ समय के लिए आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग को भी जाम किया। छात्र सड़क पर बैठ गए और मांग करने लगे कि कलेक्टर को मौके पर बुलाया जाए। स्थिति की जानकारी मिलने पर प्रशासन और पुलिस के अधिकारी छात्रों के पास पहुंचे। इनमें एसडीएम, एसडीओपी, अतिरिक्त कलेक्टर और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक समेत अन्य अधिकारी शामिल थे। अधिकारियों ने छात्रों को समझाकर वापस स्कूल लौटने के लिए कहा, लेकिन छात्रों ने अपना मार्च जारी रखा।
शिकायतों पर सुनवाई नहीं होने का आरोप
छात्रों ने आरोप लगाया कि पहले उनके द्वारा उठाई गई कई शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की गई। उनका यह भी कहना था कि उनके माता-पिता के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया जा रहा है। एक छात्रा ने आरोप लगाया, "हम एकलव्य जामली से हैं और हमने पहले जो भी मांगें उठाई थीं, उनमें से कोई भी पूरी नहीं हुई है। हमारे सामने जो फीडबैक फॉर्म एकत्र किए गए थे, उन्हें फाड़ दिया गया। हमारे माता-पिता का सम्मान नहीं किया जाता। उनके मुंह पर गेट बंद कर दिए जाते हैं।" छात्रा ने आगे कहा, "हम कलेक्टर मैडम से मिलना चाहते हैं। हम सिर्फ उन्हें अपनी समस्याओं के बारे में बताना चाहते हैं।"
जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप बना मुख्य मुद्दा
छात्रों से मुलाकात के बाद बड़वानी कलेक्टर जयति सिंह ने कहा कि जामली के छात्रों ने कई शिकायतें उनके सामने रखीं और उन्होंने छात्रों से विस्तार से बातचीत की। कलेक्टर ने कहा, "बच्चों की कुछ समस्याएं थीं, इसलिए हम उनसे मिलने आए। उन्होंने हमें अपनी समस्याओं के बारे में बताया। मुख्य मुद्दा उनके खिलाफ कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल से जुड़ा है।"
कलेक्टर ने आगे कहा, "इसके अलावा उन्होंने कुछ अन्य छोटे मुद्दे भी उठाए और हमने उनकी चिंताओं पर विस्तार से चर्चा की।" इस तरह छात्रों की शिकायतों में कथित जातिसूचक टिप्पणी का मामला सबसे अहम मुद्दे के तौर पर सामने आया है। प्रशासन ने इसे लेकर जांच की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।
खेल सुविधाओं से लेकर ऑडिटोरियम तक की मांग
छात्रों ने स्कूल में बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। इसके अलावा स्कूल में निर्माणाधीन ऑडिटोरियम का काम जल्द पूरा कराने की मांग की गई। जयति सिंह ने कहा, "वे बेहतर खेल सुविधाएं चाहते हैं। यह जानकर अच्छा लगा कि हमारे बच्चे वॉलीबॉल और खो-खो खेल रहे हैं। कुछ छात्र डांस में भी शामिल हैं और वे चाहते हैं कि निर्माणाधीन ऑडिटोरियम जल्द से जल्द पूरा हो।" उन्होंने आगे कहा, "चर्चा के दौरान ये मुद्दे सामने आए और प्राथमिक मुद्दा वही है, जिसका मैंने पहले उल्लेख किया था (जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल)। उन्होंने स्कूल की खेल सुविधाओं और निर्माणाधीन ऑडिटोरियम को लेकर भी प्रशासन के सामने अपनी अपेक्षाएं रखी हैं।"
एसडीएम-एसडीओपी की समिति करेगी जांच
कलेक्टर ने बताया कि छात्रों की शिकायतों और आरोपों की जांच के लिए एसडीएम और एसडीओपी को शामिल करते हुए एक समिति गठित की गई है। जयति सिंह ने कहा, "हम मामले को देख रहे हैं और एसडीएम तथा एसडीओपी की एक समिति गठित की गई है। पूरे मामले की जांच होने के बाद हम नियमों के अनुसार कार्रवाई करेंगे।" प्रशासन की ओर से यह संकेत दिया गया है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सतर्क
कलेक्टर ने यह भी कहा कि प्रशासन की प्राथमिक चिंता छात्रों की सुरक्षा थी। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव सावधानी बरती गई कि छात्रों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने छात्रों से उनकी चिंताओं पर चर्चा की है और उनकी शिकायतों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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