पश्चिम बंगाल में भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव के मद्

पश्चिम बंगाल में भाजपा का “भाईपो” और “पिसी” से कड़ा मुकाबला

पश्चिम बंगाल में भाजपा का “भाईपो” और “पिसी” से कड़ा मुकाबला

चुनाव में भाजपा का बड़ा मुद्दा होगा वंशवाद

गंगा प्रसाद

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रतिकूल माहौल बनाने बाबत “वंशवाद’ को मुद्दा उठाएगी। वह टीएमसी के किसी विधायक-नेता को अपने में शामिल नहीं करेगी।  पार्टी सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने यह रणनीति तक की है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के मंत्रियों व प्रभावशली नेताओं पर “वंशवाद” करने को बड़ा मुद्दा बना कर प्रचार किया जाएगा। पार्टी का मानना है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को राजनीति में बढ़ावा दे रही है। अभिषेक बनर्जी टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद हैं। इसी तरह राज्य के कई मंत्री हैं जो अपने पुत्र-पुत्री और परिवार के लोगों को राजनीति में बढ़ावा दे रहे हैं।  भाजपा नेता और विधानसभा में विपक्षी दल के नेता शुभेंदु अधिकारी ने अपनी “परिवर्तन संकल्प यात्रा” के तहत राज्य में होने वाले कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हुए अभिषेक बनर्जी के लिए “भाईपो” शब्द का प्रयोग करते हैं। भाईपो का मतलब भतीजा है। उनके भाईपो कहने का मतलब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी से हैं। वे अपनी सभाओं और रैलियों में “पिसी” शब्द का प्रयोग करते हैं। उनके “पिसी” कहने का मतलब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से है। ममता बनर्जी अभिषेक बनर्जी की बुआ  (फूफी) हैं। विपक्षी दल के नेता शुभेंदु अधिकारी की तर्ज पर भाजपा के दूसरे नेता भी भाईपो और पिसी शब्द का धड़ल्ले से प्रयोग करने लगे हैं। कहना न होगा कि ममता बनर्जी के लिए “दीदी” शब्द प्रचलित है।  भाजपा नेताओं का मनना है कि बिहार में अभूतपूर्व जीत के बाद पश्चिम बंगाल में भाजपा की साख बढ़ी है। आगामी विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी के विधायक और नेता भाजपा में आने के इच्छुक हो रहे हैं। लेकिन भाजपा में उन्हें शामिल नहीं किया जाएगा। मुकुल राय के प्रकरण में भाजपा की जीत हुई है। इस प्रकरण के बाद भाजपा नेताओं को बल मिला है। मुकुल राय ममता बनर्जी के कभी बाया हाथ कहे जाते थे। वे भाजपा में शामिल हो गए थे और भाजपा के विधायक भी हुए। लेकिन विधायक बनने के बाद वे विधायक पद से इस्तीफा दिए बिना  टीएमसी में शामिल हो गए। शुभेंदु अधिकारी ने उनके खिलाफ कलकत्त हाईकोर्ट में गए और मुकुल राय के विधायक पद खारिज कर दिए जाने का कोर्ट का फैसला हुआ।

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