भोपाल मेट्रो में एक महीने बाद भी उम्मीद से कम यात्री, संचालन खर्च निकालना हुआ मुश्किल
भोपाल। व्यावसायिक संचालन शुरू होने के एक महीने बाद भोपाल मेट्रो को उम्मीद से कहीं कम यात्री मिल रहे हैं, जिससे शहर की इस नई जन परिवहन व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार तीन डिब्बों वाली मेट्रो में प्रति यात्रा औसतन केवल 30 यात्री सफर कर रहे हैं। प्रतिदिन 13 सेवाएँ चलने के बावजूद दैनिक यात्री संख्या 300 तक भी नहीं पहुँच पा रही है।
शुरूआती उत्साह के बाद घट रही है यात्रियों की संख्या
भोपाल मेट्रो का उद्घाटन 20 दिसंबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किया था, जबकि आम जनता के लिए सेवाएँ 21 दिसंबर से शुरू हुई थीं। शुरुआती उत्साह के बावजूद पहले ही सप्ताह के बाद यात्री संख्या में लगातार गिरावट देखी गई।
पहले दिन भारी भीड़, फिर तेज गिरावट
मेट्रो निगम के आँकड़ों के अनुसार, पहले दिन 6,568 यात्रियों ने सफर किया और ₹2.05 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ। लेकिन इसके बाद संख्या तेजी से घटी। 30 दिसंबर को सबसे कम यात्री दर्ज हुए — केवल 967 लोग। क्रिसमस जैसे अवकाश के दिन थोड़ी बढ़त दिखी, जब 4,264 यात्री सफर पर निकले। सामान्य कार्य दिवसों में यात्री संख्या लगातार कम बनी रही।
समय और सेवाएँ बदलीं, फिर भी सुधार नहीं
कम मांग को देखते हुए मेट्रो प्रशासन ने लॉन्च के 14 दिनों के भीतर परिचालन समय बदला और दैनिक ट्रिप की संख्या भी घटाई। अब 3 जनवरी से सेवाएँ सुबह 9 बजे की बजाय दोपहर 12 बजे से शुरू होती हैं और आखिरी ट्रेन शाम 7:30 बजे AIIMS स्टेशन से रवाना होती है। इन बदलावों के बावजूद, रविवार को छोड़कर बाकी दिनों में यात्री संख्या में कोई खास सुधार नहीं हुआ।
जनवरी में भी हालात कमजोर
13 से 20 जनवरी के बीच कुल लगभग 3,350 यात्री मेट्रो से चले — यानी प्रतिदिन औसतन 400 से कुछ अधिक।13, 15 और 19 जनवरी जैसे कई कार्यदिवसों में यात्री संख्या 300 से भी कम रही।15 जनवरी को तो सिर्फ 275 यात्री मेट्रो में सवार हुए।
कम यात्री संख्या के कारण
अधिकारियों के अनुसार मुख्य कारण हैं, सीमित परिचालन समय, आंशिक रूट कवरेज, और लॉन्च के समय कोई रियायत या मुफ्त यात्रा योजना न होना शामिल है। इसके विपरीत, इंदौर मेट्रो ने शुरुआती दिनों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी थी और पहले ही दिन करीब 26,000 यात्री मिले थे, जबकि भोपाल मेट्रो ने पहले दिन से ही किराया वसूला।
आर्थिक स्थिति भी चिंता का विषय
वर्तमान यात्री संख्या से संचालन खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है। रोजाना किराया संग्रह औसतन ₹10,000 जबकि संचालन खर्च लगभग ₹1 लाख प्रतिदिन है। मेट्रो अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही मासिक पास, छात्रों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए रियायती किराया शुरू करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि नियमित यात्रियों को आकर्षित किया जा सके।
गैर-किराया आय के विकल्प भी तलाशे जा रहे
मेट्रो निगम स्टेशन परिसरों में एटीएम, फूड कोर्ट और व्यावसायिक क्षेत्रजै से माध्यमों से गैर-किराया राजस्व बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जैसे-जैसे कनेक्टिविटी बढ़ेगी और लोगों की आदत बनेगी, वैसे-वैसे यात्री संख्या में सुधार होगा।