मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो के परिचालन

भोपाल मेट्रो की रफ़्तार को लगेंगे पंख: ₹800 करोड़ की लागत से सिग्नलिंग सिस्टम का काम शुरू

फाइल फोटो

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो के परिचालन को और अधिक प्रभावी और तेज बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। सुभाष नगर से एम्स (AIIMS) के बीच बने प्रायोरिटी कॉरिडोर पर अब सिग्नलिंग सिस्टम (Signalling System) का काम आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है।

आधुनिक सिंग्नलिंग और संचार प्रणाली स्थापित होगी

बजट और टेंडर: मेट्रो के इस चरण के लिए करीब 800 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया गया है। यह राशि लगभग 30 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर आधुनिक सिग्नलिंग और संचार प्रणाली स्थापित करने के लिए खर्च की जाएगी।

वर्तमान में एक ही ट्रैक से संचालन

अभी भोपाल मेट्रो केवल एक ही ट्रैक पर संचालित हो रही है, जिससे इसकी आवृत्ति (frequency) और गति सीमित है। सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा होने के बाद ट्रेनों के बीच का समय अंतराल कम होगा और परिचालन सुरक्षित व तेज हो जाएगा।

पहला चरण सुभाष नगर से एम्स के बीच

प्रायोरिटी कॉरिडोर: काम का पहला चरण सुभाष नगर से एम्स के बीच शुरू किया गया है। यह वही हिस्सा है जहाँ वर्तमान में मेट्रो का ट्रायल और शुरुआती परिचालन देखा जा रहा है।

सिग्नलिंग सिस्टम यह बदलेगा

आधुनिक तकनीक (जैसे CBTC) के आने से ट्रेनों की गति में इजाफा होगा। स्टेशन पर यात्रियों को अगली ट्रेन के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ऑटोमैटिक ट्रेन कंट्रोल से हादसों की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। सिग्नलिंग का काम पूरा होते ही दोनों ट्रैकों पर सुचारू रूप से गाड़ियाँ दौड़ सकेंगी।

बनेगा विश्व स्तरीय

करीब 800 करोड़ रुपये के इस भारी-भरकम निवेश से भोपाल मेट्रो को विश्व स्तरीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है, जिससे शहरवासियों का सफर न केवल आसान बल्कि बेहद आधुनिक भी होगा।

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