सराफा बाजार में रौनक लौटने के संकेत दिख रहे हैं, ज

सराफा बाजार में रौनक लौटने की उम्मीद, सोने में नरमी तो चांदी में उछाल..., जानिए आज का भाव

Bullion Market Sees Revival Signs; Gold Softens While Silver Surges

मथुरा,(उत्तर प्रदेश)। सराफा बाजार में गुरुवार को सोने और चांदी के भाव में सीमित उतार-चढ़ाव के बीच बाजार सामान्य कारोबार के साथ खुला। सराफा कारोबारियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की चाल, डॉलर की स्थिति तथा घरेलू मांग के आधार पर कीमतों में हल्का परिवर्तन देखने को मिल रहा है। स्थानीय बाजार में ग्राहकों की आमद पिछले दिनों की तुलना में बेहतर रहने का अनुमान है, जिससे आभूषणों की खरीद-फरोख्त में भी सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

आज के अनुमानित प्रमुख भाव

24 कैरेट सोना करीब ₹1.41 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना करीब ₹1.32 प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है। जो पिछले दिन के मुकाबले नीचे है, वहीं दूसरी तरफ चांदी की कीमतों में उछाल देखने को मिला है और यह करीब ₹2.32 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है। स्थानीय बाजार में गुणवत्ता और थोक-खुदरा कारोबार के अनुसार मामूली अंतर संभव है।

मौजूदा भाव अपेक्षाकृत स्थिर

सराफा व्यापारियों का कहना है, कि जिन परिवारों में आगामी दिनों में विवाह या अन्य मांगलिक कार्यक्रम हैं, उनके लिए मौजूदा भाव अपेक्षाकृत स्थिर हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता है, तो अगले कुछ दिनों तक कीमतों में सीमित दायरे में ही उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है। निवेशक भी छोटी मात्रा में सोने की खरीदारी कर रहे हैं, जबकि चांदी में औद्योगिक मांग और निवेश दोनों का असर बना हुआ है।

हॉलमार्क, मेकिंग चार्ज और जीएसटी की भी जानकारी

बाजार विशेषज्ञों का मानना है, कि आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों को केवल धातु का भाव ही नहीं, बल्कि बीआईएस हॉलमार्क, मेकिंग चार्ज और जीएसटी की भी जानकारी लेकर ही खरीदारी करनी चाहिए। इससे ग्राहकों को शुद्धता और उचित मूल्य का लाभ मिलेगा।

बाजार का अनुमान:

सराफा कारोबारियों के अनुसार आज मथुरा में सोने के आभूषणों की खुदरा बिक्री सामान्य से बेहतर रहने की संभावना है। चांदी के सिक्के, पायल, बर्तन और निवेश योग्य चांदी की मांग भी बनी रहने का अनुमान है, यदि दिनभर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं आता, तो स्थानीय सराफा बाजार में कारोबार संतोषजनक रहने की उम्मीद है।

यह भी पढ़ेंः विभाजन के दौरान पलायन करने वाले लोग 'विस्थापित' थे, 'शरणार्थी' नहींः मोहन भागवत