कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी को हुगली के श्रीरा

कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी की श्रीरामपुर में जनसभा को दी अनुमति, जुलूस पर रोक

Calcutta HC Allows Mamata Banerjee’s Rally in Serampore

कोलकाता (पश्चिम बंगाल)। कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को हुगली के श्रीरामपुर में जनसभा करने की इजाजत दे दी है, लेकिन जीटी रोड पर प्रस्तावित जुलूस को मंजूरी नहीं मिली है। अदालत ने सभा में अधिकतम 2,000 लोगों के शामिल होने की सीमा तय की है और भड़काऊ बयानों पर भी रोक लगाई है।

सभा में 2,000 लोगों की सीमा

अदालत ने सभा में अधिकतम 2,000 लोगों के शामिल होने की अनुमति दी है। साथ ही निर्देश दिया कि कार्यक्रम के दौरान ऐसे भड़काऊ बयान नहीं दिए जाएं, जिनसे सांप्रदायिक तनाव पैदा हो सकता है। अदालत ने पुलिस को किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पर्याप्त संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती करने का भी निर्देश दिया।

जीटी रोड पर जुलूस की अनुमति से इनकार

यह आदेश तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक असीत मजूमदार की याचिका पर आया। याचिका में उन्होंने जीटी रोड पर जुलूस निकालने की अनुमति देने से पुलिस के इनकार को चुनौती दी थी। प्रस्तावित जुलूस का नेतृत्व ममता बनर्जी को करना था। याचिकाकर्ता ने दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक जुलूस निकालने का प्रस्ताव दिया था। इसमें करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई गई थी।

राज्य सरकार ने जताई यातायात बाधित होने की आशंका

राज्य सरकार ने जुलूस का विरोध करते हुए कहा कि जीटी रोड संकरी है और इसे आवागमन के लिए खुला रखना जरूरी है। सरकार के मुताबिक, इसके आसपास अस्पताल, स्कूल और एक दमकल केंद्र स्थित हैं। राज्य सरकार ने यह भी दावा किया कि यह इलाका सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील है। सरकार की ओर से कार्यक्रम के कारण स्थानीय स्तर पर संभावित असुविधा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी आपत्ति जताई गई।

तृणमूल की ओर से राजनीतिक भेदभाव का आरोप

याचिकाकर्ता के वकील सिरसान्यो बंदोपाध्याय ने दलील दी कि राजनीतिक दल नियमित रूप से जीटी रोड पर रैलियां आयोजित करते हैं। उन्होंने कहा कि जब ममता बनर्जी कोई कार्यक्रम आयोजित करना चाहती हैं, तभी आपत्ति जताई जाती है। उन्होंने बुधवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी वाली एक रैली का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, दक्षिण कोलकाता के जादवपुर में राजा एससी मल्लिक रोड पर उस कार्यक्रम के कारण यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ था।

जुलूस के विकल्प में सभा का सुझाव

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता और तृणमूल सांसद कल्याण बंदोपाध्याय ने जुलूस के विकल्प के तौर पर महेश जगन्नाथ देव स्नानपीरी मैदान में सभा आयोजित करने का सुझाव दिया। वहीं, राज्य सरकार के वकील ने प्रस्तावित समय पर जुलूस दिल्ली रोड से निकालने का सुझाव दिया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया।

अदालत ने सभा के विकल्प को किया स्वीकार

अदालत ने कार्यदिवस पर संकरी जीटी रोड पर रैली आयोजित किए जाने से स्थानीय लोगों को होने वाली असुविधा का संज्ञान लिया। इसके बाद अदालत ने याचिकाकर्ता के जुलूस के बजाय सभा आयोजित करने के सुझाव को स्वीकार कर लिया। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कोलकाता में ममता बनर्जी के राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर अदालत द्वारा पहले दिए गए दो निर्देशों का भी उल्लेख किया, जिनका कथित तौर पर पालन नहीं किया गया था।

पहले के कार्यक्रमों का भी अदालत ने किया उल्लेख

अदालत ने 21 जुलाई और 28 अगस्त को आयोजित सभाओं के दौरान दक्षिण कोलकाता की कैथेड्रल रोड की एक लेन को खुला रखने का निर्देश दिया था। दूसरी तरफ कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी गई थी। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि अधिकारियों की ओर से दाखिल रिपोर्ट के अनुसार, दोनों मौकों पर प्रतिबंधों का पालन नहीं किया गया था। सड़क के दोनों किनारों पर कथित तौर पर लोगों की भीड़ जमा हो गई थी।

यातायात और पैदल आवाजाही प्रभावित होने की बात

अदालत के अनुसार, सड़क के दोनों किनारों पर भीड़ जमा होने से वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। इसी पृष्ठभूमि में अदालत ने श्रीरामपुर में प्रस्तावित कार्यक्रम के स्वरूप को लेकर संतुलित व्यवस्था का निर्देश दिया। अदालत ने लोकतांत्रिक अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया।

प्रतिभागियों की संख्या सीमित करने पर कल्याण बंदोपाध्याय की दलील

तृणमूल सांसद कल्याण बंदोपाध्याय ने कहा कि प्रतिभागियों की संख्या सीमित करना मुश्किल होगा, क्योंकि ममता बनर्जी ‘‘पश्चिम बंगाल की सबसे करिश्माई नेता’’ हैं। न्यायाधीश ने कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता अदालत के पास आया है, इसलिए उसके लोकतांत्रिक अधिकार को बनाए रखना होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कार्यक्रम के दिन स्थिति संभालने में पुलिस को किसी तरह की परेशानी न हो। अदालत ने कहा कि दोनों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

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