जंतर-मंतर विवाद में बढ़ा तनाव, निशु के समर्थन में कार्रवाई की मांग तेज
नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर NEET विरोध प्रदर्शन के महीनों बाद संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पर तनाव तब भड़क उठा जब कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका वहां इकट्ठा हुए और स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह कथित तौर पर कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता पर हमला करने के बावजूद अपने राजनीतिक संबंधों के कारण जेल नहीं गए।
निशु और संजय के लिए न्याय की मांग
CJP प्रतिनिधिमंडल निशु और उनके पिता संजय के लिए न्याय की मांग करते हुए पुलिस स्टेशन पहुंचा। स्थिति बिगड़ने पर स्टेशन पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। मीडिया से बात करते हुए आशुतोष रांका ने कहा कि वे भारद्वाज के खिलाफ गंभीर आपराधिक आरोप चाहते हैं। जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान निशु के पिता संजय की पिटाई की गई। हम न्याय की मांग करते रहे। दिल्ली में अब हालात ऐसे हैं कि अपराधी खुलेआम अपना जुर्म कबूल कर रहा है, लेकिन भाजपा के इशारे पर दिल्ली पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। हम निशु और उसके पिता के साथ खड़े हैं। हम पुलिस से हत्या का मामला दर्ज करने की मांग करेंगे।
पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
इसी तरह की भावना व्यक्त करते हुए सौरभ दास ने पुलिस की प्रतिक्रिया पर जमकर निशाना साधा और इस मामले को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। ये अपराधी दिल्ली में खुलेआम क्यों घूम रहे हैं? आज अपराधी खुलेआम दावा कर रहे हैं कि उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों पर हमला किया। वे लड़कियों को धमका भी रहे हैं। दिल्ली पुलिस को इसका जवाब देना होगा। हम चुप नहीं बैठेंगे। हम दबाव बनाते रहेंगे। आज पुलिस के रवैये को देखते हुए हम आगे की कार्रवाई तय करेंगे। आज़ाद समाज पार्टी (कांशी राम) के सांसद चंद्रशेखर आजाद भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। यह विवाद एक वायरल पॉडकास्ट क्लिप से शुरू हुआ, जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज ने कथित तौर पर जंतर-मंतर घटना पर चर्चा की थी। यह क्लिप वायरल हो गई और इसने व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया।
हमला नहीं, आत्मरक्षा में की थी कार्रवाई: भारद्वाज
पॉडकास्ट में किए गए दावों का जवाब देते हुए भारद्वाज ने कहा कि उन्होंने आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी, यह हमला नहीं था। उन्होंने कहा, जिसे लोग हमला कह रहे हैं, वह आत्मरक्षा की कार्रवाई थी। अगर मैंने आत्मरक्षा में कार्रवाई नहीं की होती, तो भीड़ मुझे पीट-पीटकर मार सकती थी या मेरी जान ले सकती थी। उस पर हमला करने का कोई प्रयास नहीं था। मेरे पास वीडियो के रूप में सबूत है। मुझे 10-15 लोगों ने घेर लिया था। जब मैंने आत्मरक्षा में कार्रवाई की, तो उसके सिर पर चोट लगी। उन्होंने आगे दावा किया कि चोटें उतनी गंभीर नहीं थीं जितनी बताई जा रही हैं।
भारद्वाज ने वायरल क्लिप को बताया फर्जी
स्वतंत्र भारद्वाज ने कहा, दिल्ली पुलिस की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं आई है। मैं इस जांच में सहयोग कर रहा हूं। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य लोगों द्वारा प्रसारित वायरल पॉडकास्ट क्लिप को फर्जी बताते हुए खारिज कर दिया, जो लोग कह रहे हैं कि मुझे कपिल मिश्रा के प्रभाव से रिहा किया गया, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि कपिल मिश्रा और चिराग पासवान मेरे भाइयों जैसे हैं। लोगों को समझना चाहिए कि मैंने जो कहा वह व्यंग्य था। बढ़ते आरोपों और प्रतिदावों के बीच डीसीपी (नई दिल्ली) ने कहा है कि संजय को लगी चोटें मामूली थीं। चोटें किसी हथियार से नहीं, बल्कि कड़े से लगी थीं। खोपड़ी में दरार की गलत जानकारी तथ्यों/एमएलसी द्वारा समर्थित नहीं है और पूरी तरह निराधार है।
पुलिस ने मामला दर्ज कर दो आरोपियों से की पूछताछ
पुलिस ने आगे बताया कि मामला दर्ज किया जा चुका है। स्वतंत्र भारद्वाज समेत दो लोगों से पूछताछ की गई है। उनके बयान के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। उन्हें घटनास्थल से हिरासत में लिया गया और जांच के दौरान सूरज कुमार (24) और स्वतंत्र भारद्वाज (21) को कानून के अनुसार, नोटिस जारी कर पूछताछ की गई। उचित कानूनी कार्रवाई की गई है। जल्द ही सक्षम न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा। इस मामले में अनुचित प्रभाव या हस्तक्षेप का कोई भी आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत और निराधार है। मामले को कानून और प्रक्रियाओं के अनुसार, सख्ती से निपटाया गया है।
निशु ने 307 के तहत कार्रवाई की मांग की
डीसीपी ने आगे कहा, यह विवाद तब और बढ़ गया जब निशु आजाद ने एक वीडियो संदेश पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारद्वाज द्वारा कथित हमले के बाद उनके पिता को टांके लगवाने पड़े। स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो पूरे देश में वायरल हो रहा है, जिसमें वह खुद स्वीकार कर रहे हैं कि उन्होंने मेरे पिता के सिर पर वार किया था। उन पर हत्या के प्रयास के लिए धारा 307 के तहत मुकदमा चलाया जाना चाहिए। जब उन्होंने मेरे पिता के सिर पर वार किया और उन्हें टांके लगवाने पड़े, तो हमने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन पुलिस कुछ नहीं कर रही है।
निशु ने पुलिस पर लगाया देरी का आरोप
उन्होंने कहा कि डेढ़ महीने से ज्यादा समय बीत चुका है। पुलिस कुछ नहीं कर रही है। वे हमें गुमराह कर रहे हैं। मेडिकल जांच के नाम पर हमें उलझा रहे हैं। दिल्ली पुलिस से मेरी सारी उम्मीदें अब टूट चुकी हैं। अब मेरी एकमात्र उम्मीद राहुल गांधी से है। मुझे विश्वास है कि आप मुझे न्याय दिलाने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा, बढ़ते तनाव के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता निशु के समर्थन में सामने आए हैं और केंद्र सरकार को निशाना बना रहे हैं।
(इनपुट: ANI)
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