भोपाल। समाज में रिश्ते की बदल रहे हैं। शादी जैसे प

मप्र की राजधानी में रंग, मोटापा व खान-पान बन रहे परिवारों के टूटने की वजह

​भोपाल। समाज में रिश्ते की बदल रहे हैं। शादी जैसे पवित्र और अटूट समझे जाने वाले रिश्ते, जो कभी आपसी समझ, भरोसे और जीवनभर साथ निभाने की मिसाल माने जाते थे, अब बेहद छोटी और मामूली पसंद-नापसंद की भेंट चढ़ते नजर आ रहे हैं। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के परिवार परामर्श केंद्र में हाल ही में पहुंचे तीन अलग-अलग मामलों ने बदलते दौर में बिखरते रिश्तों की एक हैरान कर देने वाली हकीकत को उजागर किया है।

भिंडी की सब्जी, रंग-रूप बन रही रिश्ते में दरार की वजह

​इन मामलों में कहीं खाने में 'भिंडी की सब्जी' विवाद की मुख्य वजह बन गई, तो कहीं जीवनसाथी का रंग-रूप और बढ़ता वजन दोनों के बीच दरार का कारण बन गया। मामूली सी लगने वाली ये बातें अब इतनी बढ़ चुकी हैं कि मामला कोर्ट और काउंसलिंग तक पहुंच गया है।

​'भिंडी की सब्जी' का विवाद पहुंचा कोर्ट

एक मामले में पति-पत्नी के बीच विवाद की शुरुआत रसोईघर और खान-पान से हुई। पति को भिंडी और अन्य सूखी सब्जियां खाना पसंद नहीं था, जबकि पत्नी अक्सर खाने में भिंडी की सब्जी बना दिया करती थी। सब्जी और भोजन की पसंद को लेकर दोनों के बीच रोजाना बहस होने लगी। धीरे-धीरे यह मामूली बहस इतनी बढ़ गई कि पति ने गुस्से में कह दिया— "तुम भिंडी बनाती हो, मैं तुम्हें तलाक दे दूंगा।" बात बढ़ते-बढ़ते दोनों के बीच अलगाव की नौबत तक आ गई और मामला कानूनी काउंसलिंग तक पहुंच गया।

रंग-रूप और शारीरिक बनावट पर टिप्पणी

​संस्कारधानी के एक अन्य मामले में एक पति अपनी पत्नी के रंग-रूप को लेकर लगातार ताने मारता था। शादी के बाद से ही पति अपनी पत्नी के सांवले रंग को लेकर खुश नहीं था और लगातार उसके लुक पर कमेंट करता रहता था। पत्नी ने जब इस मानसिक प्रताड़ना का विरोध किया तो दोनों के बीच दूरियां बढ़ गईं। अब यह रिश्ता भी टूटने की कगार पर है।

मोटापा भी बन रहा अलगाव का कारण

इस मालमे में शादी के कुछ समय बाद पत्नी का वजन बढ़ गया, जिसे लेकर पति ने आपत्ति जताना शुरू कर दिया। पति अपनी पत्नी को मोटापे के लिए लगातार टोकता था और शारीरिक बदलावों को स्वीकार करने को तैयार नहीं था। इस संवेदनहीन व्यवहार के कारण दोनों के बीच का आपसी सम्मान और संवाद पूरी तरह खत्म हो गया, जिससे मामला सुलझने के बजाय और अधिक उलझ गया।

काउंसलर्स कहते हैं

परिवार परामर्श केंद्र के विशेषज्ञों के अनुसार, ये मामले दर्शाते हैं कि आधुनिक दौर के दंपतियों में सहनशीलता, आपसी संवाद और एक-दूसरे को स्वीकार करने की क्षमता लगातार कम हो रही है। बहुत मामूली और सतही बातों को भी अहम का मुद्दा बना लिया जाता है, जिससे हंसते-खेलते घर बिखर रहे हैं। इन मामलों में दोनों पक्षों की काउंसलिंग कर समझौता कराने का प्रयास किया जा रहा है।

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