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CAQM ने पंजाब-हरियाणा में प्रदूषण नियंत्रण उपायों की समीक्षा की, जमीनी स्तर पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश

CAQM Directs Punjab and Haryana to Act on Pollution Control

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने गुरुवार को चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा सरकारों के साथ अलग-अलग समीक्षा बैठकें कीं। आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा की अध्यक्षता में हुई इन बैठकों में धान की पराली जलाने की रोकथाम, वायु प्रदूषण के अन्य प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण और जमीनी स्तर पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के उपायों की समीक्षा की गई। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, पंजाब सरकार के साथ हुई बैठक में CAQM के 15 मई के निर्देश संख्या 99 के तहत धान की पराली जलाने की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राज्य कार्य योजना के क्रियान्वयन पर ध्यान दिया गया। आयोग ने जमीनी स्तर पर नियमों के पालन, जिला स्तर की तैयारियों और पराली प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की। बैठक में जिला और किसान स्तर पर फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनों की उपलब्धता, तैनाती और प्रभावी उपयोग पर चर्चा हुई। मशीनों के इस्तेमाल में आ रही कमियों के साथ-साथ खेतों के भीतर और बाहर पराली के प्रबंधन, उसके संग्रह, परिवहन और उपयोग की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। आयोग ने फसल अवशेषों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और धान की कटाई के मुख्य मौसम में उपलब्ध मशीनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

पराली जलाने की घटनाओं पर निगरानी बढ़ाने पर जोर

बैठक में उपग्रह से मिलने वाली आग की चेतावनियों के आधार पर जले हुए क्षेत्र का मौके पर सत्यापन करने पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा, पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए जिलों में ड्रोन और कम लागत वाले सेंसर की तैनाती की समीक्षा की गई। आयोग ने ईंट भट्टों में धान के भूसे से बने बायोमास पैलेट और ब्रिकेट के इस्तेमाल को अनिवार्य करने संबंधी निर्देशों के अनुपालन का भी जायजा लिया। साथ ही, ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास सह-दहन (को-फायरिंग) के निर्धारित लक्ष्यों की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। हरियाणा सरकार के साथ बैठक में पराली जलाने के अलावा वाहनों से होने वाले प्रदूषण, सड़कों और खुले क्षेत्रों से उड़ने वाली धूल, निर्माण एवं विध्वंस (C&D) गतिविधियों और औद्योगिक प्रदूषण सहित वायु प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों की समीक्षा की गई। पराली प्रबंधन के संबंध में आयोग ने राज्य कार्य योजना के क्रियान्वयन, जमीनी स्तर पर प्रवर्तन, फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के इस्तेमाल और आपूर्ति श्रृंखला की व्यवस्था का जायजा लिया। जले हुए क्षेत्र के मौके पर सत्यापन और ड्रोन तथा कम लागत वाले सेंसर से निगरानी की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा, ईंट भट्टों में बायोमास पैलेट और ब्रिकेट के इस्तेमाल से संबंधित निर्देश संख्या 92 के अनुपालन तथा ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास सह-दहन की प्रगति पर चर्चा हुई।

वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के उपायों की समीक्षा

वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर चर्चा के दौरान वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) के नियम लागू करने के लिए ईंधन और सीएनजी स्टेशनों पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (ANPR) प्रणाली लगाने की स्थिति की समीक्षा की गई। इसके साथ ही, निर्धारित आयु पूरी कर चुके वाहनों के खिलाफ कार्रवाई, स्वच्छ परिवहन उपायों को अपनाने और एनसीआर के जिलों में डीजल से चलने वाले ऑटो-रिक्शा को चरणबद्ध तरीके से हटाने की दिशा में हुई प्रगति का भी जायजा लिया गया। आयोग ने सड़कों और खुले क्षेत्रों से उड़ने वाली धूल को कम करने के उपायों की समीक्षा की। इसमें सड़क की धूल पर नियंत्रण और मशीनों से सड़क की सफाई जैसे कदम शामिल रहे। निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों से निकलने वाली धूल को नियंत्रित करने के उपायों और निर्धारित मानकों के क्रियान्वयन की भी जांच की गई। औद्योगिक प्रदूषण के मामले में लागू मानकों का पालन, औद्योगिक इकाइयों की निगरानी और अन्य चिन्हित स्रोतों के खिलाफ प्रवर्तन उपायों की समीक्षा की गई।

राज्य सरकारों को समयबद्ध कार्रवाई की सलाह

आयोग ने राज्य कार्य योजनाओं को तय समयसीमा में लागू करने और जमीनी स्तर पर लगातार निगरानी बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके लिए राज्य विभागों, जिला प्रशासन और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर बल दिया गया। पंजाब और हरियाणा को प्राथमिकता के आधार पर कार्यान्वयन में मौजूद कमियों को दूर करने और संबंधित क्षेत्रों में समय पर सुधारात्मक कार्रवाई करने की सलाह दी गई। आयोग ने किसानों को खेतों में ही फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए मशीनों की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने और खेतों से बाहर पराली के प्रबंधन की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया। दोनों राज्यों को सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) से जुड़ी कार्य योजनाओं को जमीनी स्तर पर अधिक प्रभावी तरीके से लागू करने की सलाह भी दी गई। आयोग ने कहा कि पराली प्रबंधन को केवल आग लगने की घटनाओं को रोकने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसे नागरिकों के स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार करने के साथ-साथ धान के भूसे का अधिक उपयोग बढ़ाने और चक्रीय अर्थव्यवस्था पर आधारित मजबूत औद्योगिक व्यवस्था विकसित करने के अवसर के रूप में भी देखा जाना चाहिए।

लापरवाही पर गंभीर कार्रवाई की चेतावनी

CAQM ने जमीनी स्तर पर तत्काल कार्रवाई का आह्वान करते हुए जिला प्रशासनों को चेतावनी दी कि पराली जलाने की घटनाएं बढ़ने की वजह बनने वाली किसी भी तरह की ढिलाई को गंभीरता से लिया जाएगा। आयोग ने दोहराया कि धान की पराली जलाने पर प्रभावी रोक लगाने और वायु प्रदूषण को व्यापक रूप से नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकारों और सभी संबंधित एजेंसियों के निरंतर और समन्वित प्रयास जरूरी हैं। सर्दियों के महत्वपूर्ण दौर में इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करना विशेष रूप से आवश्यक है।

(ANI)

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