CBI ने विजयवाड़ा की कंपनी और चार निदेशकों पर यूनिय

24.81 करोड़ की बैंक ऋण धोखाधड़ी में CBI का केस, कंपनी के चार निदेशक आरोपी

CBI Case in ₹24.81 Crore Bank Loan Fraud

विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश): केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने विजयवाड़ा स्थित एक निजी कंपनी, उसके चार निदेशकों और अज्ञात सरकारी कर्मचारियों व निजी व्यक्तियों के खिलाफ यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से जुड़े 24.81 करोड़ रुपये के कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में केस दर्ज किया है। यह केस मंगलवार (18 अगस्त) को विशाखापत्तनम स्थित सीबीआई की भ्रष्टाचार-विरोधी शाखा (एसीबी) में यूनियन बैंक के विजयवाड़ा जोनल कार्यालय के सहायक महाप्रबंधक की शिकायत पर दर्ज किया गया।

कंपनी और चार निदेशक आरोपी

आरोपियों में ओमकारा विजयलक्ष्मी स्ट्रिप्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक कोटा भानु प्रसाद, कोटा श्रावणी, कोटा प्रुद्वी वेंकट तेजा और कोटा राहुल साई बालाजी शामिल हैं। एफआईआर में अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के नाम भी दर्ज किए गए हैं।

24.98 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा का आरोप

एफआईआर के अनुसार, गैल्वनाइज्ड पाइप और अन्य इस्पात उत्पादों का निर्माण करने वाली कंपनी ने कथित तौर पर 2024 में अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर विजयवाड़ा स्थित यूनियन बैंक की सूर्यराओपेटा शाखा से ऋण प्राप्त करने के लिए आपराधिक साजिश रची। कंपनी ने कथित तौर पर करूर वैश्य बैंक से लिए गए अपने मौजूदा ऋण को अपने नाम कराने के लिए झूठे वित्तीय विवरण और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए। प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर बैंक ने 22 फरवरी, 2024 को कुल 24.98 करोड़ रुपये की निधि-आधारित और गैर-निधि-आधारित ऋण सुविधाएं स्वीकृत कीं।

23.85 करोड़ का स्टॉक, मिला सिर्फ 25 लाख का

एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने बाद में बैंक को प्रस्तुत विवरणों में अपने स्टॉक और बही-खातों के ऋणों का मूल्य बढ़ा-चढ़ाकर बताया। एक निरीक्षण के दौरान कंपनी ने लगभग 23.85 करोड़ रुपये के स्टॉक की घोषणा की थी, जबकि वास्तविक रूप से उपलब्ध स्टॉक का मूल्य केवल लगभग 25 लाख रुपये पाया गया। बैंक ने 17 मई, 2025 को 24 करोड़ रुपये की कार्यशील पूंजी सीमा का नवीनीकरण किया। एफआईआर में कहा गया है कि बाद में किए गए ऑडिट में भी घोषित और वास्तविक स्टॉक के बीच भारी अंतर पाया गया।

बही-खातों और देनदारियों पर भी सवाल

सीबीआई ने आगे आरोप लगाया कि कंपनी ने अपने घोषित बही-खातों के ऋणों के लिए सहायक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए और अपने बकाया देनदारों का विवरण प्रस्तुत करने में भी विफल रही। एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया कि कंपनी के कारोबार और ऋण पात्रता को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए कुछ संस्थाओं के माध्यम से लेनदेन किए गए। इसमें मारुति ट्रेडर्स और श्री दुर्गा भवानी स्टील्स से जुड़े प्रमुख लेनदेन का उल्लेख किया गया है, जिनकी स्थापना कथित तौर पर 2024 में हुई थी और बैंक द्वारा जांच किए जाने के समय वे परिचालन में नहीं थे।

संदिग्ध लेनदेन और स्टॉक की आवाजाही

एफआईआर के अनुसार, जांच में संदिग्ध लेनदेन, निदेशकों और वैधानिक लेखा परीक्षकों में अनधिकृत परिवर्तन और बैंक को सूचित किए बिना स्टॉक की आवाजाही भी पाई गई। ब्याज का भुगतान करने में विफल रहने के बाद कंपनी के खाते को 23 जून, 2025 को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत किया गया था। इसके बकाया लगभग 26.05 करोड़ रुपये थे, जिसमें अर्जित ब्याज भी शामिल है।

बैंक को 24.81 करोड़ के नुकसान का आरोप

सीबीआई का आरोप है कि आरोपियों ने यूनियन बैंक को 24.81 करोड़ रुपये का अनुचित नुकसान पहुंचाया और इसके बदले में उन्होंने खुद अनुचित लाभ प्राप्त किया। मामले में जांच जारी है।

(एएनआई)

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