मध्यप्रदेश में अफसरों और नेताओं के बीच टकराव, केंद्र ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र
भोपाल (एमपी)। मध्यप्रदेश में पिछले कुछ समय से नौकरशाही (Bureaucracy) और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल की कमी और विवाद की खबरें सामने आ रही थीं। अब इस मामले में केंद्र सरकार ने सीधा हस्तक्षेप किया है। भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के डिप्टी सेक्रेटरी जीके रजनीश ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव (CS) अनुराग जैन को एक औपचारिक पत्र लिखा है।
व्यवहार सुधारने के दिये निर्देश
पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राज्य के अधिकारियों को सांसदों और विधायकों (जनप्रतिनिधियों) के साथ उचित और विनम्र व्यवहार करने का तरीका सिखाया जाए। यह कदम उन शिकायतों के बाद उठाया गया है जिनमें कहा गया था कि अधिकारी जनप्रतिनिधियों के पत्रों का जवाब नहीं देते या उनके साथ शिष्टाचार का पालन नहीं करते। मध्यप्रदेश में कई बार सांसदों और विधायकों ने यह आरोप लगाया है कि प्रशासनिक अधिकारी उनकी बातों को अनसुना करते हैं और विकास कार्यों में सहयोग नहीं कर रहे हैं, जिससे जनता के बीच उनकी छवि प्रभावित हो रही है।
पत्र में दी गई हिदायतें
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजे गए पत्रों और सुझावों का समय सीमा के भीतर विनम्रतापूर्वक जवाब दें। सरकारी प्रोटोकॉल के अनुसार जनप्रतिनिधियों को मिलने वाला सम्मान और महत्व सुनिश्चित किया जाए। केंद्र ने याद दिलाया है कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता की आवाज होते हैं, इसलिए अधिकारियों का उनके प्रति व्यवहार सहयोगात्मक होना चाहिए।
मामला इसलिए भी चर्चा में
यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आमतौर पर राज्य के आंतरिक प्रशासनिक मामलों में केंद्र इस तरह के सख्त निर्देश तभी देता है जब टकराव की स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगे। यह घटना राज्य के प्रशासनिक ढांचे और राजनीतिक नेतृत्व के बीच की गहरी होती खाई को दर्शाती है, जिसे पाटने के लिए अब मुख्य सचिव स्तर पर कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।
यह भी पढ़ें: https://www.primenewsnetwork.in/state/mp-ias-reshuffle-sanjay-kumar-shukla-appointed-acs-home/183350