चंडीगढ़ हेल्थ सर्विस रूल्स 2026 अधिसूचित: डॉक्टरों की भर्ती, प्रमोशन और प्राइवेट प्रैक्टिस के नए नियम
चंडीगढ़। चंडीगढ़ हेल्थ सर्विस रूल्स 2026: डॉक्टरों की भर्ती से लेकर प्रमोशन और निजी प्रैक्टिस तक, प्रशासन ने तय किए कड़े नियम चंडीगढ़ प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत 'यूटी चंडीगढ़ हेल्थ सेवा नियम (ग्रुप-ए जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर सब-कैडर), 2026' को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। इस अहम नीतिगत बदलाव के तहत विभाग में जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर्स की भर्ती, प्रमोशन, सेवा शर्तों और पूरे कैडर के ढांचे को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत जारी की गई ये नई नियमावली आधिकारिक गजट में प्रकाशन की तिथि से ही प्रभावी हो गई है।
कैडर का ढांचा और पदों की मौजूदा स्थिति
नई सेवा नियमावली के दायरे में सभी ग्रुप-ए के पद शामिल किए गए हैं। इनमें मेडिकल ऑफिसर, सीनियर मेडिकल ऑफिसर, चीफ मेडिकल ऑफिसर, एडिशनल डायरेक्टर, डायरेक्टर (हॉस्पिटल) और डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन) जैसे उच्च पद शामिल हैं। अधिसूचना के मुताबिक, वर्तमान में चीफ मेडिकल ऑफिसर, सीनियर मेडिकल ऑफिसर और मेडिकल ऑफिसर के स्तर पर कुल 186 स्वीकृत पद हैं। वहीं, शेड्यूल में डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन), डायरेक्टर (हॉस्पिटल) और एडिशनल डायरेक्टर के पदों की संख्या फिलहाल शून्य दर्शाई गई है। हालांकि, प्रशासन की जरूरतों और समय की मांग के अनुसार इन स्वीकृत पदों की संख्या में भविष्य में संशोधन किया जा सकता है।
समयबद्ध प्रमोशन और DACP योजना का लाभ
नियमों के अनुसार चिकित्सा अधिकारियों को बिना रिक्तियों की बाध्यता के 'डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेसिव (DACP)' योजना के तहत समयबद्ध पदोन्नति का लाभ मिलेगा। लेवल-10 में 56,100 रुपये से 1,77,500 रुपये के वेतनमान पर काम करने वाले मेडिकल ऑफिसर को 8 साल की नियमित सेवा पूरी करने के बाद सीनियर मेडिकल ऑफिसर के रूप में प्रमोशन पाने की पात्रता होगी। इसके बाद, एक सीनियर मेडिकल ऑफिसर को इस ग्रेड में 5 साल की सेवा पूरी करने पर चीफ मेडिकल ऑफिसर के पद पर पदोन्नत किया जा सकता है।
प्रमोशन के लिए तय किए गए कड़े बेंचमार्क
डायरेक्टर (हॉस्पिटल) के पद पर प्रमोशन पाने के लिए चीफ मेडिकल ऑफिसर के पास 4 साल का सेवा अनुभव होना अनिवार्य किया गया है, साथ ही इसके लिए 'वेरी गुड' का गोपनीय प्रदर्शन बेंचमार्क आवश्यक होगा। मेडिकल ऑफिसर से सीनियर मेडिकल ऑफिसर पद पर प्रमोशन के लिए 'गुड' बेंचमार्क तय किया गया है। जबकि सीनियर मेडिकल ऑफिसर से चीफ मेडिकल ऑफिसर और चीफ मेडिकल ऑफिसर से डायरेक्टर (हॉस्पिटल) तक के प्रमोशन के लिए 'वेरी गुड' बेंचमार्क की शर्त रखी गई है।
भर्ती प्रक्रिया और यूपीएससी की भूमिका
मेडिकल ऑफिसर के पदों पर भर्ती डेप्युटेशन (प्रतिनियुक्ति) और सीधी भर्ती (डायरेक्ट रिक्रूटमेंट) के मिले-जुले माध्यम से की जाएगी। इसके लिए 60:40 का अनुपात तय किया गया है। नियमों के मुताबिक, 60 फीसदी पद डेप्युटेशन के जरिए भरे जाएंगे (और ऐसा न होने पर सीधी भर्ती से), जबकि 40 फीसदी पद सीधी भर्ती के माध्यम से भरे जाएंगे (और ऐसा न होने पर डेप्युटेशन से)। सीधी भर्ती की प्रक्रिया संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा और उसके बाद इंटरव्यू या चयन प्रक्रिया के आधार पर पूरी की जाएगी।
योग्यता, आयु सीमा और प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूर्ण प्रतिबंध
सीधी भर्ती के लिए उम्मीदवारों के पास मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की डिग्री होनी चाहिए और नियुक्ति से पहले उनका अनिवार्य रोटेटिंग इंटर्नशिप पूरा होना आवश्यक है। इसके अलावा, सीधी भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष तय की गई है, जिसमें सरकारी कर्मचारियों को नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट दी जाएगी। सबसे बड़ा नीतिगत निर्णय यह लिया गया है कि इस सेवा के तहत नियुक्त होने वाले सभी अधिकारियों के लिए किसी भी प्रकार की प्राइवेट प्रैक्टिस (जिसमें कंसल्टेशन और लेबोरेटरी प्रैक्टिस शामिल है) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि, पात्र चिकित्सक सरकार द्वारा तय दरों के अनुसार नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) के हकदार होंगे।
विभागीय प्रमोशन कमेटी का गठन
अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि डायरेक्टर (हॉस्पिटल) के पद तक के सभी विभागीय प्रमोशन मामलों पर विचार करने के लिए एक निर्धारित डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी (DPC) काम करेगी। वरिष्ठ पदों पर पदोन्नति के लिए गठित इस समिति की अध्यक्षता यूटी चंडीगढ़ के मुख्य सचिव करेंगे, जबकि स्वास्थ्य और कार्मिक विभागों के वरिष्ठ अधिकारी इसके सदस्य के रूप में शामिल होंगे। (भाषांतर: Ravi Pandey । इनपुट: ANI)
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