बलरामपुर में पहली ही बारिश में बह गई 4.88 करोड़ की सिंचाई परियोजना, किसानों ने लगाया घटिया निर्माण का आरोप
बलरामपुर (छत्तीसगढ़)। जल संसाधन विभाग की करोड़ों रुपये की महत्वाकांक्षी भाला गिरवानी सिंचाई परियोजना पहली ही तेज बारिश में सवालों के घेरे में आ गई है। इस परियोजना के अंतर्गत लगभग 4.88 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन कंक्रीट नहर कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई है। निर्माण पूरा होने से पहले ही नहर में आई दरारों और टूट-फूट ने कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, नहर की मरम्मत के दौरान भी तकनीकी मानकों की अनदेखी किए जाने के आरोप लगने से मामला और अधिक गंभीर हो गया है।
पहली बारिश में नहर क्षतिग्रस्त, किसानों को झटका
जानकारी के अनुसार, घाघा नदी से निकाली जा रही लगभग 5.5 किलोमीटर लंबी कंक्रीट नहर के माध्यम से भाला, विजयनगर सहित आसपास के गांवों की करीब 200 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जानी है। यह परियोजना क्षेत्र के किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी, लेकिन पहली ही तेज बारिश में नहर के कई हिस्सों के क्षतिग्रस्त होने से किसानों की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।
किसानों ने घटिया निर्माण का लगाया आरोप
स्थानीय किसान सरवन सोनी, इफ्तेखार खान, विनीत गुप्ता और रामकुमार धुर्वे का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान ही उन्होंने विभागीय अधिकारियों को गुणवत्ता संबंधी शिकायतें दी थीं। किसानों का कहना है कि निर्माण में निर्धारित मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया गया, कंक्रीट की उचित क्योरिंग नहीं हुई तथा कार्य की विभागीय निगरानी भी प्रभावी नहीं रही। उनका आरोप है कि इन्हीं लापरवाहियों के कारण पहली ही बारिश में नहर क्षतिग्रस्त हो गई।
वाइब्रेटर मशीन की जगह डंडों से दबाया जा रहा कंक्रीट
ग्रामीणों का कहना है कि नहर टूटने के बाद किए जा रहे मरम्मत कार्य में भी तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप है कि कंक्रीट डालने के दौरान जहां वाइब्रेटर मशीन का उपयोग किया जाना चाहिए, वहां मजदूर केवल डंडों से कंक्रीट को दबाकर कार्य कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वाइब्रेटर मशीन का उपयोग नहीं होने पर कंक्रीट के भीतर हवा के खाली स्थान (वॉइड्स) रह जाने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे संरचना की मजबूती प्रभावित हो सकती है। ऐसे में ग्रामीणों ने मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
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