छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: 3,000 करोड़ की अवैध कमाई का बड़ा हिस्सा कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल को मिला: ED
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल को एक दिन पहले गिरफ्तार किया था। एजेंसी का आरोप है कि राज्य के शराब कारोबार में कथित गड़बड़ियों से करीब 3,000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई थी, जिसका एक बड़ा हिस्सा अग्रवाल को मिला था।
राजीव भवन में कैश पहुंचाने का आरोप
'घोटाले' में कैश संभालने और उसे इधर-उधर करने वाले लोगों के बयानों (जो PMLA, 2002 की धारा 50 के तहत दर्ज किए गए थे) के आधार पर ED ने कहा, "कैश के रूप में हुई अवैध कमाई का एक बड़ा हिस्सा रामगोपाल अग्रवाल को तब दिया गया था, जब वे छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष थे।" ED ने एक बयान में कहा, "यह कैश रामगोपाल अग्रवाल के कहने पर और सिंडिकेट के लोगों के जरिए रायपुर के राजीव भवन में पहुंचाया गया था, जो उस समय छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी का कार्यालय था।"
समन्स की अनदेखी और रिमांड
ED ने बताया कि छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष अग्रवाल को 11 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। वे PMLA, 2002 की धारा 50 के तहत जारी चार समन के बावजूद पेश नहीं हुए थे और बाद में अपना बयान दर्ज कराते समय उन्होंने टालमटोल वाले जवाब दिए थे। रायपुर की सेंट्रल जेल में विचाराधीन कैदी के तौर पर बंद अग्रवाल को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ़्तार किया गया और रायपुर की स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया गया, जिसने उन्हें 18 अगस्त तक सात दिनों के लिए ED की कस्टडी में भेज दिया।
2019-2023 के आबकारी घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा
ED ने रायपुर की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB) द्वारा दर्ज FIR और उसके बाद स्पेशल कोर्ट (प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट), रायपुर में दाखिल चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट के आधार पर जांच शुरू की। इन चार्जशीट में 2019 से 2023 के दौरान छत्तीसगढ़ के आबकारी प्रशासन में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था।
सिंडिकेट द्वारा अवैध कमाई का नेटवर्क
ED ने कहा कि जांच से पता चला है कि अनिल टुटेजा (रिटायर्ड IAS), अनवर ढेबर और अरुण पति त्रिपाठी (ITS) के एक सिंडिकेट ने राज्य के शराब कारोबार में बड़े पैमाने पर घोटाला किया और लगभग 3,000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की। यह कमाई शराब की बिक्री पर अवैध कमीशन, बिना हिसाब-किताब वाली देसी शराब की बिक्री, डिस्टिलर्स से सालाना कमीशन और विदेशी शराब कंपनियों व FL-10A लाइसेंस देने के बदले कमीशन से हुई।
1000 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त
अग्रवाल की गिरफ्तारी इस मामले में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त करने के लगभग दो महीने बाद हुई है। यह जब्ती प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत 28 मई को जारी तीन प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) के बाद की गई। इसमें लगभग 200 करोड़ रुपये की डीड वैल्यू और 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित मार्केट वैल्यू वाली संपत्तियों को निशाना बनाया गया। एजेंसी के अनुसार, "व्यापारी अनवर ढेबर और पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा के नेतृत्व वाले शराब सिंडिकेट ने कथित तौर पर 2019 और 2023 के बीच राज्य की आबकारी व्यवस्था में हेरफेर किया।"
विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से जुड़ी संपत्तियां
पहला कुर्की आदेश विकास अग्रवाल और अनवर ढेबर से जुड़ी संपत्तियों से संबंधित है। जांचकर्ताओं का आरोप है कि विकास ने मुख्य फाइनेंशियल हैंडलर के तौर पर काम किया, डिस्टिलरी और लाइसेंस धारकों से कमीशन इकट्ठा किया और फंड को ढेबर तक पहुंचाया। विकास के परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद संपत्तियों को उनकी कथित अवैध कमाई के बराबर जब्त किया गया है। ED ने ढेबर से जुड़ी कई बेनामी संपत्तियों को भी अटैच किया है। इनमें रायपुर में 'ढेबर सिटी होम्स' के प्लॉट और 'शाइनिंग स्टार बिल्डकॉन', 'मूनलाइट रियल एस्टेट', 'स्वर्ण इंफ्राबिल्ड' और 'जय गुरुदेव इंफ्रास्ट्रक्चर' जैसी शेल कंपनियों के जरिए रखी गई जमीन के कई टुकड़े शामिल हैं। अटैच की गई इन संपत्तियों की कुल कीमत लगभग 30 करोड़ रुपये आंकी गई है।
गोवा के होटल और वित्तीय हेरफेर
दूसरी कुर्की में, ED ने उत्तरी गोवा के अंजुना में स्थित एक प्रीमियम होटल प्रॉपर्टी-'होटल वेस्टिन गोवा' को निशाना बनाया। यह प्रॉपर्टी 'पैसिफ़िका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' के नाम पर रजिस्टर्ड है, जिसके डायरेक्टरों में राहुल अग्रवाल और विजय कुमार अग्रवाल शामिल हैं। एजेंसी का आरोप है कि यह होटल पूरी तरह से लगभग 110 करोड़ रुपये की अपराध से कमाई गई रकम (proceeds of crime) से खरीदा गया था। यह रकम बिना हिसाब-किताब वाले कैश के तौर पर दी गई थी, जो कथित तौर पर शराब घोटाले से आई थी। इसे छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के कहने पर पहुंचाया गया था। चैतन्य बघेल को ED ने पिछले साल जुलाई में इस मामले में गिरफ्तार किया था।
FL-10A लाइसेंस वाली कंपनियों पर कार्रवाई
तीसरी कुर्की में वित्तीय संपत्तियां शामिल हैं, जिनमें तीन FL-10A लाइसेंस वाली कंपनियों-'ओम साई बेवरेजेज़ प्राइवेट लिमिटेड', 'दिशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड' और 'नेक्सजेन पावर इंजीटेक प्राइवेट लिमिटेड'--के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड शामिल हैं। ED के अनुसार, इन कंपनियों को अपने मुनाफे का 50-60 प्रतिशत हिस्सा सिंडिकेट को ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया था, जो लगभग 51 करोड़ रुपये बैठता है।
छठी सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर
इसी मामले से जुड़ी एक और घटनाक्रम में, ED ने रायपुर की एक स्पेशल PMLA कोर्ट में अपनी छठी सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (पूरक अभियोजन शिकायत) दायर की है, जिसमें चार और आरोपियों- विजय भाटिया, टी. भुवनेश्वर राव, प्रोबीर शर्मा और निखिल चंद्राकर के नाम शामिल हैं। जांचकर्ताओं का आरोप है कि भाटिया ने दबाव में ओम साई बेवरेजेज में 52.5 प्रतिशत बेनामी हिस्सेदारी हासिल की थी, जबकि शर्मा घोटाले से जुड़ी बड़ी मात्रा में नकदी की आवाजाही में शामिल थे। (इनपुट: ANI)
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