दिल्ली में इस साल 214 दिन साफ हवा दर्ज, 1 नवंबर से गैर-BS-VI बाहरी गाड़ियों की एंट्री पर रोक: सिरसा
नई दिल्ली: दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि राजधानी में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ठोस कदम उठा रही है। एक प्रेस रिलीज के मुताबिक, दिल्ली में इस साल अब तक 214 दिन साफ हवा वाले दर्ज किए गए हैं, जो कोविड-19 के दौर को छोड़कर पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा हैं। सिरसा ने कहा कि नीति आयोग और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की गाइडलाइंस के अनुसार, करीब 30 एजेंसियां 11 सूत्रीय प्रदूषण नियंत्रण योजना पर काम कर रही हैं। इसके तहत ट्रैफिक प्रबंधन, धूल नियंत्रण, औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी और हरित क्षेत्र बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।
बिना वैध PUC प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा ईंधन
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि दिल्ली में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) से जुड़े नियम सख्ती से लागू किए जाएंगे। उन्होंने वाहन मालिकों से अपील की कि वे वैध PUC प्रमाणपत्र के बिना दिल्ली में प्रवेश न करें। नियमों का उल्लंघन करने पर वाहनों के खिलाफ कार्रवाई और जुर्माना लगाया जा सकता है। सिरसा ने बताया कि दिल्ली के सभी पेट्रोल पंपों को 'नो PUC, नो फ्यूल' अभियान का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। इसके तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के बिना वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा। सरकार की घोषित कार्ययोजना के तहत 1 नवंबर, 2026 से दिल्ली के बाहर से आने वाले उन वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही गई है, जो BS-VI उत्सर्जन मानकों को पूरा नहीं करते हैं। प्रेस रिलीज के मुताबिक, लागू नियमों के तहत कुछ विशेष श्रेणियों के वाहनों और आवश्यक सेवाओं को छूट दी जाएगी। मंत्री ने कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर वाहनों की निगरानी की जा रही है। ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से राजधानी में प्रवेश करने वाले वाहनों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि प्रदूषण संबंधी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
चौबीसों घंटे निगरानी, शिकायतों पर कार्रवाई
सिरसा ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण और नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (I-CCC) के जरिए चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है। इसके लिए तकनीक आधारित प्रणालियों के साथ वार्डों में निगरानी वाहन भी तैनात किए गए हैं। उन्होंने कहा कि 311 ऐप पर मिलने वाली शिकायतों का समय पर निपटारा सुनिश्चित करने के लिए निगरानी टीमों की संख्या बढ़ाई गई है। खुले में कचरा या पत्तियां जलाने, धूल नियंत्रण के नियमों का उल्लंघन करने और प्रदूषण फैलाने वाली अन्य गतिविधियों से जुड़ी शिकायतों पर संबंधित एजेंसियां कार्रवाई करेंगी। दिल्ली सरकार प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नजर रखने और नियंत्रण के लिए तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था मजबूत कर रही है। मंत्री के मुताबिक, राजधानी के 283 निर्माण स्थलों पर 608 एंटी-स्मॉग गन लगाई गई हैं। इसके अलावा, करीब 200 ऊंची इमारतों पर भी एंटी-स्मॉग गन लगाई गई हैं। दिल्ली की सड़कों पर 103 मैकेनिकल रोड स्वीपर तैनात किए गए हैं। वहीं, अलग-अलग प्रदूषण हॉटस्पॉट पर मिस्ट स्प्रे यूनिट लगाई गई हैं। प्रेस रिलीज के अनुसार, 3,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली निर्माण साइटों पर निर्धारित नियमों के तहत एंटी-स्मॉग गन और मिस्ट सिस्टम लगाना जरूरी है।
निर्माण कार्यों पर रोक और वर्क फ्रॉम होम की योजना
सरकार की कार्ययोजना में 1 नवंबर से 31 जनवरी तक बाहरी निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर रोक लगाने का प्रस्तावित उपाय भी शामिल है। इसके अलावा, खुले में कचरा जलाने पर रोक, निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने और कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था जैसे कदम भी योजना का हिस्सा हैं। ये उपाय संबंधित आदेशों और निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार लागू किए जाएंगे।
70 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 78 लाख पौधे लगाने का दावा
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि दिल्ली में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए भी बड़े स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 70 लाख पौधे लगाने के लक्ष्य के मुकाबले अब तक कुल 78 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। सिरसा ने लोगों से अपने PUC प्रमाणपत्र वैध रखने, निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग को प्राथमिकता देने तथा खुले में कचरा नहीं जलाने की अपील की। उन्होंने नागरिकों से प्रदूषण संबंधी नियमों के उल्लंघन की जानकारी संबंधित एजेंसियों को देने का भी आग्रह किया।
(ANI)