उन्हें इस राज्य के लिए कुछ करना था, केंद्रीय बजट में क्यों नहीं किया प्रावधान? : CM ममता बनर्जी
कोलकाता। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण बिल के साथ डिलिमिटेशन बिल लाकर पश्चिम बंगाल को छिन्न-भिन्न करना चाहती है। उसकी इस राज्य का हिस्से को दूसरे राज्य मेन मिलाने की साजिश है। ऐसा करने पर पश्चिम बंगाल चुप नही बैठेगा। उन्होंने कहा कि इस राज्य के विधानसभा चुनाव के समय भाजपा के आला केंद्रीय मंत्री और तमाम नेता यहां आकर बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर रहे हैं। उन्हें इस राज्य के लिए कुछ करना था तो केंद्रीय बजट में क्यों नहीं प्रावधान किया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय वित्त निर्मला सीतारमण का नाम लिए बगैर संकेत में “कार्ड” बांट कर चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने आरोप लगाया और यह जिक्र कर चुनाव आयोग को घेरा कि वह उनके खिलाफ जानबूझ कर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उत्तर बंगाल के कूचबिहार जिले के माथाभांगा और अलीपुरदुआर में टीएमसी की चुनावी सभा में केंद्र सरकार, भाजपा और चुनाव आयोग पर खूब बरसी।
उन्होंने केंद्र सरकार और भाजपा को बंगाल और बांग्ला विरोधी बताया और कहा कि केंद्र सरकार बंगाल के हिस्से की विभिन्न योजनाओं की राशि पिछले पांच साल से नहीं दे रही है। भाजपा शासित राज्यों में बंगाल को लोगों के बाग्ला बोलने पर बांग्लादेश बता कर अत्याचार किया जाता है। भाजपा के केंद्रीय मंत्री और नेता इकट्ठे यहां आकर वोट मांग रहे है। उन्होंने कहा कि भाजपा के केंद्रीय मंत्री और नेता यहां प्रलोभन देकर और रुपए बांट कर चुनाव जितना चाहते है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपरा नेता उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान व दूसरे भाजपा शासित राज्यों से अपने लोगों को लाकर विभिन्न जगहों पर जमा कर रहे हैं और वोट के दिन वोट लूट करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता बंगाल में बुलडोडजर चलाने की बात कर रहे हैं। भाजपा ने बिहार में चुनाव के पहले महिलाओं को रुपए बांटे और फिर चुनाव के बाद उनके घरों पर बुलडोजर चलवाए। उन्होंने बंगाल के लोगों को भाजपा मंत्रियों-नेताओं के झांसे में नहीं पड़ने, उन पर विश्वान नहीं करने, उनका कार्ड लेकर अपना नाम, ठिकाना, बैंक खाता नंबर, आधार नंबर नहीं देने के लिए आगाह किया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए कहा कि बंगाल में बिगड़ रही कानून व्यवस्था और अराकता के लिए चुनाव आयोग जिम्मेदार है। वे मुख्यमंत्री हैं, लेकिन उनके अधिकार छिन लिए गए हैं। चुनाव आयोग ने बंगाल में लाजिकल डिसक्रिपेंसी के नाम पर 60 लाख वोटरों का नाम काटा। बिहार चुनाव में लाजिकल डिसक्रिपेंसी नहीं किया। लेकिन बंगाल के साथ इस आधार पर वोटरों को नाम काटा।
चुनाव आयोग निरपेक्ष नहीं रह गया है। वह भाजपा का साथ देकर पक्षपात कर रहा है। भाजपा चुनाव आयोग के साथ मिल कर बंगाल पर कब्जा करना चाहती है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नोयडा की घटना का जिक्र किया और कहा कि वहां कौन अधिकारी है, यग बताने की जरूरत नहीं है।
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