हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू

हिमाचल में चुनावी घमासान तेज, सीएम सुक्खू ने भाजपा की गुटबाजी पर साधा निशाना

हिमाचल में चुनावी घमासान तेज

शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को 2027 के विधानसभा चुनावों में दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में लौटने के भाजपा के दावों को चुनौती दी और कहा कि राज्य की जनता ही चुनावी नतीजों का फैसला करेगी। शिमला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, सीएम सुक्खू ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल पांच गुटों में बंटा हुआ है। चुनावी सफलता के उसके सार्वजनिक दावे केवल आंतरिक समूहों को मजबूत करने और आगे की टूट-फूट को रोकने के लिए हैं।

2027 में जनता सुनाएगी फैसला

अगले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा के अनुमानों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुक्खू ने कहा कि अंतिम फैसला 2027 में मतदाता करेंगे। उन्होंने कहा, वे जो चाहें कहें। जनता फैसला करेगी। मुझे परिणाम तय नहीं करना है। जब 2027 में परिणाम आएंगे, तो जनता अपना फैसला सुनाएगी। उससे पता चल जाएगा कि हमने क्या काम किया है। सुक्खू ने आरोप लगाया कि दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के भाजपा के बयान उसके विभिन्न गुटों का मनोबल बढ़ाने और विधायकों को पाला बदलने से रोकने के लिए हैं। उन्होंने कहा, भाजपा पांच गुटों में बंटी हुई है। उसके कुछ विधायक एक समूह से दूसरे समूह में जा रहे हैं। इन बयानों को उन्हें रोकने के लिए गढ़ा जा रहा है।

जयराम को हटाने की कोशिश में गुटबाजी

उन्होंने आगे दावा किया कि भाजपा के आंतरिक सर्वे बताते हैं कि वह अगले विधानसभा चुनाव में सीटें गंवा सकती है। सुखू ने कहा, मैंने कहा है कि भाजपा के 28 में से 16 विधायक अगला चुनाव नहीं जीतेंगे और पार्टी को पिछली बार से कम सीटें मिलेंगी। पार्टी के भीतर अलग-अलग गुटों का मनोबल बढ़ाने के लिए ये दावे किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ भाजपा नेता अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि एक अन्य गुट नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर को हटाना चाहता है। उन्होंने कहा कि वह ठाकुर के रोजाना के बयानों को ज्यादा महत्व नहीं देते, क्योंकि उनका उद्देश्य केवल भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को अपनी राजनीतिक सक्रियता दिखाना है।

सुक्खू ने वित्तीय प्रबंधन का किया बचाव

सुक्खू ने अपनी सरकार के वित्तीय प्रबंधन का बचाव करते हुए कहा कि जब उनकी सरकार 2023 में सत्ता में आई थी, तब उसे विरासत में भारी कर्ज और देनदारियां मिली थीं। साथ ही राजस्व और केंद्रीय सहायता के महत्वपूर्ण स्रोत भी कम हुए थे। उन्होंने कहा कि जब उनकी सरकार ने कार्यभार संभाला, तब राज्य पर 76,633 करोड़ रुपये का कर्ज था और लगभग 10,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त देनदारियां थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए कर्ज लिया, साथ ही राजस्व सुधारने और खर्च घटाने के लिए प्रयास भी किए। सुक्खू द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछली भाजपा सरकार ने 2017-18 से 2022-23 के बीच कुल 43,261 करोड़ रुपये के कर्ज लिए थे। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने 2023-24 से 22 अक्टूबर, 2026 के बीच 37,781 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आंकड़ों में खुले बाजार, नाबार्ड और अन्य स्रोतों से लिया गया कर्ज शामिल है।

RDG बंद होने से बढ़ा वित्तीय दबाव

सुक्खू ने कहा कि जीएसटी मुआवजे के बंद होने और रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) यानी राजस्व घाटा अनुदान के वापस लिए जाने के बाद सरकार पर दबाव और बढ़ गया था। उन्होंने कहा कि राज्य को पहले लगभग 8,000 करोड़ रुपये से 10,000 करोड़ रुपये तक का वार्षिक आरडीजी समर्थन मिलता था, लेकिन 16वें वित्त आयोग ने इस अनुदान को बंद कर दिया। उन्होंने कहा, जब आपके 40 प्रतिशत संसाधन छीन लिए जाएं, तो आप तिजोरी कैसे चलाएंगे? जब आरडीजी बंद हुआ और हम बजट तैयार कर रहे थे, तब हमारे सामने एक बड़ी चुनौती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय बाधाओं के चलते राज्य का बजट 2025-26 के लगभग 58,900 करोड़ रुपये से घटाकर लगभग 54,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने वित्तीय अनुशासन, कथित भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और अतिरिक्त राजस्व जुटाने के प्रयासों के जरिए इसका जवाब दिया है।

शराब दुकानों की नीलामी से 400 करोड़ अतिरिक्त राजस्व

सुक्खू ने अतिरिक्त राजस्व जुटाने के सरकार के प्रयासों के उदाहरण के तौर पर वाइल्डफ्लॉवर हॉल मामले, शराब की दुकानों की नीलामी और रॉयल्टी से जुड़े विवाद का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने वाइल्डफ्लॉवर हॉल के संबंध में 401 करोड़ रुपये वसूले हैं और उसे प्रति माह लगभग 1.70 करोड़ रुपये किराया मिल रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुरानी नवीनीकरण प्रणाली की तुलना में शराब की दुकानों की नीलामी से लगभग 400 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ है। जेएसडब्लू (JSW) से जुड़े रॉयल्टी विवाद का जिक्र करते हुए सुक्खू ने कहा कि सरकार ने इस मामले को आगे बढ़ाया और लगभग 150 करोड़ रुपये की वसूली सुनिश्चित की। उन्होंने तर्क दिया कि इस अतिरिक्त राजस्व से सरकार को अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की देनदारियों को पूरा करने में मदद मिली है।

ओपीएस पर कायम रहेगी सरकार

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार पुरानी पेंशन योजना को लागू करना जारी रखेगी और कहा कि यह फैसला चुनावी नफे-नुकसान के बजाय सामाजिक सुरक्षा पर आधारित है। उन्होंने कहा कि सरकार ने चतुर्थ श्रेणी (Class IV) के कर्मचारियों के पेंशन बकाये का निपटारा कर दिया है और अन्य श्रेणियों के कर्मचारियों के बकाए का भी काफी हद तक भुगतान कर दिया है। सुक्खू ने सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) की 5 प्रतिशत किस्त और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को अतिरिक्त 10,000 रुपये के भुगतान की हालिया घोषणा का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि राज्य की वित्तीय कठिनाइयों के बावजूद सरकार कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, कोई भी सरकार कर्मचारियों, किसानों, बागवानों या युवाओं को परेशान करने के लिए फैसले नहीं लेती। हमें लोगों के कल्याण के लिए काम करना है, और हम चुनौतियों के बावजूद आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार वित्तीय सुधारों और विकास पहलों को आगे बढ़ाती रहेगी, और अंत में कहा कि 2027 के विधानसभा चुनावों में मतदाता ही सरकार के कामकाज का फैसला करेंगे।

(इनपुट: ANI)

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